विशेष संवाददाता / मुंबई
मुंबई समेत राज्य के कई शहरों में तेजी से चल रही इमारतों की पुनर्विकास प्रक्रिया के चलते पासपोर्ट आवेदन के लिए आवश्यक पते की पुलिस सत्यापन में नागरिकों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह मुद्दा महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक मनीषा चौधरी ने लक्षवेधी सूचना अंत से उठाया। इस विषय पर जवाब देते हुए राज्य के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस प्रक्रिया को लेकर सरकार का स्पष्ट और दृढ़ पक्ष सामने रखा। उन्होंने कहा,“पुलिस सत्यापन एक अत्यंत संवेदनशील और जिम्मेदार प्रक्रिया है। अगर किसी इमारत को ध्वस्त कर दिया गया है और आवेदक वहां निवास नहीं करता, तो ऐसे पते पर सकारात्मक रिपोर्ट देना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है।”
पुनर्विकास के दौरान नागरिकों को अन्यत्र किराए पर रहना पड़ता है। पासपोर्ट आवेदन में मूल पते पर पुलिस जाती है, जो अब अस्तित्व में नहीं होता।कई बार सोसाइटी NOC, किराया, समझौते जैसी औपचारिकताओं में देरी होती है। उच्च शिक्षा या विदेश नौकरी हेतु पासपोर्ट प्रक्रिया में विलंब या रद्दीकरण की नौबत आती है।
गृहमंत्री का स्पष्ट उत्तर और नीति रुख अपनाई पुलिस द्वारा सत्यापन प्रक्रिया में कोई ढील नहीं दी जाएगीआवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड, न्यायालयीन समन या वारंट आदि की जांच आवश्यक है। ध्वस्त इमारत पर सकारात्मक रिपोर्ट देना गलत। यदि भवन भौतिक रूप से मौजूद नहीं है और व्यक्ति वहां निवास नहीं करता, तो रिपोर्ट देना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। किराया पते पर सत्यापन संभव: पुनर्विकास के दौरान विकासकर्ता द्वारा दिए गए किराया अनुबंध के पते पर सत्यापन स्वीकार्य है। इस शर्त पर पुलिस वहां जाकर रिपोर्ट देती है। भविष्य के लिए डिजिटल समाधान व मानकीकरण आवश्यक:सरकार द्वारा डिजिटल रेसिडेंशियल वेरिफिकेशन प्रणाली व नीति में संशोधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, परंतु सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
विधायिका मनीषा चौधरी की मांगें: नागरिकों को NOC, पुलिस सत्यापन जैसी मांगों से मानसिक व प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।सरकार को चाहिए कि मानकीकृत प्रक्रिया, पोर्टल व प्रशिक्षण योजना लागू करे।
पुनर्विकास प्रभावित नागरिकों हेतु विशेष पते की सुरक्षा नीति बनाई जाए।
शहरीकरण की प्रक्रिया में पते का बार-बार बदलना एक वास्तविकता है, लेकिन पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ के लिए सुरक्षा और सत्यता सर्वोपरि है। गृहमंत्री द्वारा विधानसभा में दिया गया उत्तर यह दर्शाता है कि सरकार पारदर्शिता व कड़ी सुरक्षा के बीच संतुलन साधना चाहती है।
