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सीएम इंटर्नशिप योजना हवा में उड़ गया अनुदान!

-२०२४ में ईडी सरकार ने की थी शुरुआत

-५,५०० करोड़ रुपए का रखा था बजट

-सालभर से रुकी है प्रशिक्षुओं की किस्त

रामदिनेश यादव / मुंबई

राज्य की महायुति सरकार आए दिन नई-नई घोषणाएं कर रही है। राज्य में बड़े-बड़े निवेश लाकर लाखों युवाओं को रोजगार देने का झांसा दे रही है, लेकिन असल में इस सरकार के कार्य जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालात यह है कि युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए मुख्यमंत्री इंटर्नशिप योजना शुरू की गई थी, जिसके तहत प्रशिक्षुओं को ६ से १० हजार रुपए स्टाइपेंड (मानधन) देने की योजना है, लेकिन प्रशिक्षुओं को मिलने वाला सरकार का यह अनुदान हवा में उड़ चुका है।
वर्ष २०२५ में प्रशिक्षुओं को यह मानधन अभी तक नहीं मिला है। कई जगह से ऐसी शिकायतें लगातार आ रही हैं। मानधन के इंतजार में प्रशिक्षुओं को मुफ्त में काम करने के लिए बेबस होना पड़ रहा है, जिसके चलते प्रशिक्षुओं में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
बता दें कि महाराष्ट्र में हर साल ११ लाख बच्चे स्नातक एवं डिप्लोमा करके पास होते हैं। छात्रों को ट्रेनिंग देने के उद्देश्य से पिछले साल महायुति सरकार ने काफी जोर-शोर में मुख्यमंत्री युवा प्रशिक्षण योजना अर्थात सीएम इंटर्नशिप योजना शुरू की थी। इसके तहत छात्रों को कंपनी में इंटर्नशिप करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बदले उन्हें कंपनी से नहीं, बल्कि सरकार की ओर से ६ से १० हजार रुपए तक स्टाइपेंड का भुगतान किया जाएगा। लेकिन इस सरकार ने शुरुआत के कुछ महीने तो दिए, पर बाद में आर्थिक तंगी में प्रशिक्षुओं के पैसे रोक दिए हैं।
वर्ष २०२५ में इस योजना के तहत युवाओं को पैसे मिलना बंद हो गया है। जबकि सरकार ने इसके लिए ५,५०० करोड़ का बजट भी रखा है। फिर भी यह रकम रिलीज नहीं की जा रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह मुद्दा विधानसभा सत्र में भी उठ चुका है एनसीपी नेता रोहित पवार ने यह मुद्दा सदन में उठाया था। सरकार ने आस्वस्त किया था कि जल्द ही प्रशिक्षुओं को उनके इंटर्नशिप के स्टाइपेंड का भुगतान किया जाएगा, लेकिन अब तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया है।
अपनी ही सरकार को भाजपा नेता ने घेरा
इस मामले में हाल ही में भाजपा की एक नेता ने भी तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए ट्वीट किया। और सरकार से सवाल किया कि इन प्रशिक्षुओं को भुगतान कब किया जाएगा? भाजपा नेता ने बताया कि प्रशिक्षकों को भुगतान नहीं होने से सरकार की बदनामी हो रही है। कई युवा प्रशिक्षु आकर मुझे तलब करते हैं। कंपनी वाले भी सरकार के इमेज पर उंगली उठा रहे हैं। ऐसे सरकार की छवि युवाओं के बीच खराब हो रही है।

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