मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिकोंकण रेलवे की ‘सृजन के रंग’ गोष्ठी में बिखरे साहित्य-संगीत के रंग

कोंकण रेलवे की ‘सृजन के रंग’ गोष्ठी में बिखरे साहित्य-संगीत के रंग

 -कविता, लघुकथा, संस्मरण और लोकसंगीत की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया भावविभोर

सामना संवाददाता / मुंबई

कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित ‘सृजन के रंग’ कला गोष्ठी में साहित्य, संगीत और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध रंग देखने को मिले। राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत 27 सितम्बर को बेलापुर स्थित पंचशील विश्राम गृह परिसर में आयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा ने की।
गोष्ठी में मुंबई और नवी मुंबई के कई रचनाकारों ने अपनी काव्य रचनाओं, लघुकथाओं, संस्मरणों और लोकसंगीत की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमरीश सिन्हा, संतोष कुमार झा, रागिनी शाह, डॉ. अलका अग्रवाल सिग्तिया, डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, आनंद प्रकाश सिंह, वरिष्ठ गीतकार गजानन महतपुरकर, वरिष्ठ अभिनेता एवं कवि रवि यादव, वरिष्ठ संगीतकार एवं गायक सरोज सुमन, रेडियो जॉकी एवं साहित्यकार शिल्पा राठी, स्टैंड-अप कॉमेडियन एवं कवयित्री डॉ. ऋचा श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार रमेश मिश्रा, कोंकण रेलवे के राजभाषा अधिकारी सदानंद चितळे तथा परमाणु ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कवि प्रिंस ग्रोवर ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं।
अध्यक्षीय संबोधन में संतोष कुमार झा ने कहा कि साहित्य और संगीत जीवन को सुरुचिपूर्ण बनाते हैं तथा चुनौतियों से लड़ने की ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी आमंत्रित कलाकारों और रचनाकारों के प्रति कोंकण रेलवे की ओर से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रिंस ग्रोवर ने किया। आयोजन को सफल बनाने में राजभाषा अधिकारी सदानंद चितळे के साथ राजभाषा विभाग के वरिष्ठ कार्मिक सतीश धुरी और प्रिया निकेत की प्रमुख भूमिका रही।

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