सामना संवाददाता / मुंबई
कल्याण तालुका में १४ गांवों को शामिल करने को लेकर खींचतान चल रही है। वहीं अब संकेत मिलने लगे हैं कि ये गांव मनपा चुनाव तक नई मुंबई महानगरपालिका की सीमा में ही रहेंगे। न्यायालय के आदेश के अनुसार, राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय अधिकारियों को मनपा सीमा में वार्ड गठन से संबंधित कार्यक्रम पेशकश किया है। वरिष्ठ प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि ये गांव मनपा सीमा में ही रहेंगे, क्योंकि इस कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है।
नई मुंबई के विभिन्न मुद्दों को लेकर हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में वर्षा बंगले में बैठक आयोजित की गई। वन मंत्री गणेश नाईक की पहल पर आयोजित इस बैठक में सिडको, मनपा और नगर विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में १४ गांवों को शामिल करने का मुद्दा उठाया गया। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि बैठक में यह मुद्दा उठा कि इन गांवों को तकनीकी रूप से बाहर नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग ने मनपा सीमा के भीतर वार्ड गठन की प्रक्रिया शुरू करने का कार्यक्रम तय किया है। इस पर खुद गणेश नाईक और किसी और ने आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता की घोषणा होने से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कल्याण तालुका के १४ गांवों को नई मुंबई महानगरपालिका सीमा में शामिल करने का निर्णय लिया था। डॉ. श्रीकांत शिंदे के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले इन गांवों को नई मुंबई महानगरपालिका में शामिल करने का निर्णय लिया गया और डॉ. शिंदे को इसका राजनीतिक लाभ मिलेगा।
मनपा पर वित्तीय बोझ बनेंगे ये गांव
ऐसी आशंका है कि ये गांव नई मुंबई महानगरपालिका पर वित्तीय बोझ बनेंगे, जो राज्य की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक है। अभिजीत बांगर जब मनपा आयुक्त थे, तब उन्होंने सरकार को एक रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें कहा गया था कि इन गांवों के विकास के लिए ६,००० करोड़ रुपए की आवश्यकता है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए वन मंत्री गणेश नाईक ने इन गांवों को शामिल करने का विरोध किया है। नाईक ने मांग की है कि इन गांवों को मनपा की सीमा से बाहर रखा जाए और इस मुद्दे पर शिंदे और नाईक के बीच टकराव और बढ़ गया है।
