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विवादित ‘जैन नगरी’ बयान पर घिरे…भाजपा विधायक मेहता का यू-टर्न

-बोले-‘मीरा-भायंदर आगरी-कोलियों का शहर’
सुरेश गोलानी / मुंबई
एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मीरा-भायंदर को ‘जैन नगरी’ बताने वाले भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता को शिंदे गुट और स्थानीय भूमिपुत्रों के तीखे विरोध के बाद अपने विवादित बयान से यू-टर्न ले लिया है। शिंदे गुट के प्रवक्ता दीप काकडे और स्थानीय भूमिपुत्रों ने मेहता के जैन नागरी वाले बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे केवल राजनीतिक विवाद खड़ा करने की सोची-समझी कोशिश करार देते हुए याद दिलाया कि मीरा-भायंदर मूल रूप से स्थानीय आगरी और कोली समाज के भूमिपुत्रों की नगरी है। चुनाव के समय हर घर में वोट मांगने वाले नेता का शहर को केवल एक पंथ का बताना मतदाताओं का अपमान है। चौतरफा घिरने के बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने एक प्रेस कॉन्प्रâेंस बुलाकर अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘यह वक्तव्य एक जैन धार्मिक कार्यक्रम के संदर्भ में दिया गया था, जिसका कुछ राजनीतिक दलों ने अपने फायदे के लिए गलत अर्थ निकाला।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि मीरा-भायंदर शहर मूल रूप से आगरी, कोली और मराठी मानुष का ही है। मेहता ने कहा, ‘मराठी समाज के आशीर्वाद से ही मैं जनप्रतिनिधि बना हूं। यदि मेरे बयान से किसी भी समाज या धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए तहे दिल से माफी मांगता हूं।’ भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता और उनकी पार्टी पर पहले भी धर्म की राजनीति और खास वर्ग के तुष्टीकरण (वोट बैंक) के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में मेहता के स्वामित्व वाले सेवन स्क्वायर स्कूल ने जैन त्योहार पर्यूषण के दौरान छात्रों के टिफिन में कंदमूल (आलू, प्याज, लहसुन) लाने पर प्रतिबंध का सर्कुलर जारी किया था, जिसके खिलाफ मनसे और अन्य संगठनों ने भारी विरोध जताते हुए उन पर सर्वसमावेशक शिक्षा के बजाय धार्मिक एजेंडा थोपने के आरोप लगाए थे।

बयान पर चौतरफा घेराव
‘जैन नगरी’ वाले बयान को लेकर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के खिलाफ शिंदे गुट और स्थानीय भूमिपुत्रों का विरोध तेज हुआ। आलोचकों ने कहा कि मीरा-भायंदर को किसी एक पंथ से जोड़ना शहर की बहुजातीय और बहुधार्मिक पहचान को सीमित करने जैसा है।

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