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महायुति सरकार की पनाह में पल रहे भ्रष्ट अधिकारी! …२०९ अधिकारियों के खिलाफ करप्शन का केस

-अभी तक सस्पेंड नहीं किए जाने पर उठ रहे सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो विभाग से बेहद चौंका देने वाली जानकारी सामने आई है। भ्रष्ट महायुति सरकार के संरक्षण में भ्रष्ट अधिकारी पल रहे हैं। जानकारी के अनुसार अलग-अलग विभाग के २०० से ज्यादा सरकारी अधिकारियों के खिलाफ करप्शन का केस दर्ज किया गया, लेकिन सरकार की मेहरबानी के चलते उन्हें अब तक सस्पेंड नहीं किया गया है। इससे यह बात साफ हो जाती है कि सरकार करप्ट अधिकारियों के पक्ष में खड़ी है।
महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के आंकड़े बताते हैं कि राज्यभर के विभिन्न सरकारी विभागों के कम से कम २०९ अधिकारी, जिन पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए हैं, बावजूद इसके अभी तक भ्रष्टाचार के आरोपियों को निलंबित नहीं किया गया हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि जिन अधिकारियों को निलंबित नहीं किया गया है, उनमें सबसे ज्यादा संख्या मुंबई रेंज की है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर तक १९ विभिन्न विभागों के २०९ सरकारी अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में निलंबित नहीं किया गया है। इनमें से ३६ प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारी हैं, जबकि १२५ तृतीय श्रेणी के अधिकारी हैं। जानकारी के मुताबिक, शिक्षा / खेल विभाग के ४८ अधिकारी, नगर निगमों के ३६ अधिकारी, राजस्व / पंजीकरण / भूमि अभिलेख विभाग के ३१, पुलिस / जेल / होमगार्ड विभागों के २६ और ग्रामीण विकास विभाग के १६ अधिकारी उन शीर्ष समूहों में शामिल हैं, जहां निलंबन की कार्रवाई अभी भी लंबित है। आंकड़े आगे बताते हैं कि जिन मामलों में अधिकारियों को निलंबित नहीं किया गया, उनमें सबसे ज्यादा (४७) मामले मुंबई से सामने आए, उसके बाद ठाणे (४३), छत्रपति संभाजीनगर (२८), पुणे (२३), नासिक (२२), अमरावती (२१), नागपुर (१४) और नांदेड़ (११) का स्थान है। इनमें से कुछ मामले २०१४ तक के हैं।

११ नवंबर तक एसीबी ने दर्ज किए ६०१ मामले
-एसीबी के आंकड़ों के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार १९ सरकारी अधिकारियों को अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है।
-इस साल ११ नवंबर तक, एसीबी ने भ्रष्टाचार से जुड़े ६०१ मामले दर्ज किए, जिनमें ५८८ जालसाजी और नौ आय से अधिक संपत्ति के मामले शामिल हैं।
-एसीबी के अधिकारी दबी जुबान में यही कहते नजर आते हैं कि जिन अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है, उन्हें नोटिस जारी किया जाना चाहिए और तुरंत सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
-एसीबी अधिकारी यह भी कह रहे हैं जब वे किसी भ्रष्टाचार के मामले में शामिल अधिकारी को पकड़ते हैं, तो मामले का विवरण संबंधित विभाग के साथ साझा करते हैं। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई करना विभाग पर निर्भर करता है।

 

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