धीरज फूलमती सिंह
मुंबई
आजकल लगभग हर किसी के पास मोबाइल फोन होता है। जिस तेजी से तकनीक का विकास हो रहा है, उतनी ही तेजी से मानव मष्तिष्क का विकास भी हो, यह संभव नहीं है। आज के जमाने में तकनीकी विकास की अंधी दौड़ में बच्चे कितनी तेजी से अपनी उम्र से कही ज्यादा वयस्क हो जा रहे हैं। जब तक यह बात समझ आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। उनको पता ही नहीं होता कि कब यही तकनीकी विकास उनके लिए अभिशाप बन जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर रील्स के प्रभाव के बारे में चिंताओं के बाद डॉक्टर अब एक नए बढ़ते संकट ‘आंखों और मष्तिष्क को होने वाली क्षति’ को लेकर बहुत चिंतित हैं। आपके और आपके बच्चों के द्वारा मोबाइल के साथ बिताया गया, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, विशेष रूप से इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील देखने से नेत्र विकारों में वृद्धि हो रही है। एक-दो मिनट की रील देखने की लत से दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पडता है। रील्स की लत आपकी याददाश्त की क्षमता को खत्म कर रहा है। जैसे मधुमखियां नहीं होती, जो अपने शहद के छत्ते के साथ चिपकी रहती हैं, वैसे ही ज्यादातर लोग अपने फोन से चिपके हुए रहते हैं। मनोरंजन के साथ टाइम पास करने के मकसद से शुरू किया गया,यह काम धीरे-धीरे लत में बदलते जा रहा है। रील्स की लत लगने से एक व्यक्ति के ध्यान की क्षमता कम और मानसिक तनाव ज्यादा बढ़ जाता है। इसकी वजह से एक व्यक्ति को दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और चिंता जैसी समस्या का सामना करना पडता है। रील का खेल हमें डोपामिन का लती बना देता है। डोपामिन हमारे दिमाग का एक केमिकल है जो खुशी, आनंद और संतोष का कारण होता है। जैसे शराब या सिगरेट के बाद राहत महसूस होती है, वैसे ही कुछ लोगों को रील देखने के बाद राहत महसूस होती है, लेकिन यह राहत क्षणिक होती है, फिर वही बेचैनी लौट आती है, इससे मानसिक परेशानियां शुरू होती हैं।
नंगई करने लगा है ‘एआई’
अभी एआई का धमाका हुआ, कुछ समय हुआ है और अभी से इसकी धमक महसूस होने लगी है। अधिकांश लोग आज यही समझते है कि एआई को सब पता है लेकिन हकीकत यह है कि इस पर उपलब्ध जानकारी सिर्फ ६० प्रतिशत से ७२ प्रतिशत तक ही सही होती है, बाकी कई बार तो यह भी गच्चा खा जाता है।
अभी तो एआई तकनीक अपने शुरुआती दौर में ही है पर यह अभी से लोगों को डराने और धमकाने लगा है, पता नहीं भविष्य में और क्या करेगा? अभी हाल में ही एआई के एक प्लेटफॉर्म ग्रॉक ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्लेटफॉर्म के मालिक दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क है।
हाल के दिनों में एक नया ट्रेंड चल रहा है, जहां कुछ लोग फेक अकाउंट बनाकर महिलाओं की फोटो अपलोड करते हैं और ग्रॉक से कहते हैं कि उनके कपड़े कम करें, बिकिनी पहनाएं या सेक्शुअल तरीके से इमेज बदलें। इससे डीपफेक जैसी अश्लील तस्वीरें बन रही हैं, जो बिना सहमति के शेयर की जा रही हैं। इन तस्वीरों के लिए महिलाओं से कोई अनुमति नहीं ली जाती। कई बार वे महिलाएं खुद भी नहीं जानतीं कि उनकी तस्वीरों का ऐसा इस्तेमाल हो रहा है। इस मसले पर सरकार भी तभी सचेत हुई, जब शिवसेना यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से इस पर कार्रवाई करने की मांग की। एआई प्लेटफॉर्म ग्रॉक कितना विवादित, कितना अश्लील और कितना गैर जिम्मेदार है, वह इस बात से पता चलता है कि मलेशिया और इंडोनेशिया इस प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले देश बन चुके है।
