-डेटा सेंटर का रु. ४.८ लाख लेकर लोकतंत्र का सौदा
सामना संवाददाता / मुंबई
कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में लोकतंत्र की साख पर सबसे बड़ा दाग लगा है। एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि सिर्फ ८० रुपए में एक मतदाता का नाम मतदाता सूची से डिलीट किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि एक डेटा सेंटर ने ४.८ लाख रुपए लेकर निर्वाचन प्रक्रिया से सौदा किया। इस घोटाले से पूरा राज्य सकते में है और विपक्षी दलों ने सरकार व चुनाव आयोग पर संवैधानिक विफलता का आरोप लगाया है।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यह सिर्फ वोट चोरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव पर हमला है। अब एसआईटी ने फर्जीवाड़े में शामिल ऑपरेटर्स और डेटा सेंटर मालिकों के खिलाफ जांच तेज कर दी है, जबकि सवाल कायम है कि क्या ८० रुपए में लोकतंत्र बिक गया?
एसआईटी जांच के अनुसार, आलंद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्रत्येक आवेदन पर ८० रुपए का भुगतान किया गया। दिसंबर २०२२ से फरवरी २०२३ के बीच कुल ६,०१८ आवेदन किए गए, जिन पर ४.८ लाख रुपए खर्च हुए। ये सभी आवेदन कलबुर्गी जिले के एक डेटा सेंटर से भेजे गए। आयोग के पोर्टल पर आवेदन दर्ज करने के लिए ७५ अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें मुर्गी फार्म मजदूरों से लेकर पुलिसकर्मियों के नंबर तक शामिल थे। कई मामलों में मतदाताओं के नाम और पते जानबूझकर गलत भरे गए और अधिकतर लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके नाम से आवेदन किया गया है।
एक व्यक्ति की पहले ही मिली थी संलिप्तता
इस मामले की शुरुआत में स्थानीय पुलिस और सीआईडी साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने जांच की थी। जांच में मोहम्मद अशफाक नामक व्यक्ति की संलिप्तता मिली थी। वर्ष २०२३ की जांच के दौरान उसने अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सौंपने का वादा किया था, लेकिन बाद में वह दुबई भाग गया। एसआईटी ने उसके इंटरनेट कॉल रिकॉर्ड की जांच की और उसके साथियों मोहम्मद अकरम, जुनैद, असलम और नदीम का पता लगाया। जांच में पाया गया कि अकरम और अशफाक डेटा सेंटर चलाते थे, जबकि बाकी डेटा एंट्री ऑपरेटर थे। एसआईटी ने उनके लैपटॉप जब्त किए, जिनसे मतदाता नाम हटाने के आवेदन दाखिल किए गए थे।
