मुख्यपृष्ठखबरेंदिल्ली लाइव : अंधेर नगरी चौपट राजा..!

दिल्ली लाइव : अंधेर नगरी चौपट राजा..!

अरुण कुमार गुप्ता

मोदी सरकार ने पूरे देश को मजाक बनाकर रख दिया है। अंधेर नगरी चौपट राजा..! कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। २००८ में जब डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार थी तब कच्चे तेल की कीमत १५० रुपए के आसपास थी। उस समय सरकार ने पांच प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर पेट्रोल बेचना शुरू किया, ताकि दाम कंट्रोल में रहें। उस समय मक्के से इथेनॉल बनाया जाता था और मक्के की कीमत ७ या ८ रुपए किलो थी। मक्के से बने इथेनॉल की कीमत १८ रुपए प्रति लीटर थी। जो उस समय पेट्रोल की कीमत से काफी कम थी। आज चावल, मक्का और गन्ने से इथेनॉल बनाया जा रहा है। एफसीआई यानी फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ४४ रुपए प्रति किलो के हिसाब से चावल खरीद कर इसी चावल को सब्सिडी देकर इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को ३० रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेच रहा है, फिर इन्हीं कंपनियों से सरकार ६४ रुपए प्रति लीटर के हिसाब से इथेनॉल खरीद रही है। इसी एथेनॉल को पेट्रोल में २० प्रतिशत मिलकर बेचा जा रहा है। अब आप सोचिए, जो चावल सब्सिडी देकर इथेनॉल बनानेवाली कंपनियों को बेचा जाता है, लेकिन उन्हीं कंपनियों से इथेनॉल पूरी कीमत देकर खरीदा जा रहा है। दूसरी बात वर्तमान में शुद्ध पेट्रोल की कीमत ५० रुपए प्रति लीटर और इथेनॉल की कीमत ६४ रुपए लीटर पड़ रहा है। ऐसे में फिर इथेनॉल मिलावट की जरूरत क्या है। अब मक्का की बात करें तो इस समय २२ रुपए प्रति किलो के आसपास दाम है। देश में ५० प्रतिशथ एथेनॉल मक्का से बनाया जाता है। मक्का से बना इथेनॉल और भी महंगा ७२ रुपए प्रति लीटर खरीदा जा रहा है, जबकि बाहर से आयात करें तो ६० रुपए प्रति लीटर पड़ता है। जब शुद्ध पेट्रोल ५० रुपए प्रति लीटर पड़ रहा है तो इतने महंगे दाम पर इथेनॉल खरीदने की जरूरत क्या है। अब इसकी क्रोनोलॉजी समझिए। इस देश के नेता ऐसी पॉलिसी बनाएंगे, जिससे उनके बच्चे करोड़ों कमाएंगे और आम लोगों को नंगा करके लूटा जाएगा। यहां यह अभी बता देना जरूरी है कि ज्यादातर इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां ‘गेडा’ करी के बेटों की हैं। अंत में यही कहा जा सकता है कि इस देश के लोगों को पूरी तरह गुलाम बना दिया गया है। आजादी छीन ली गई है।
चंपत राय महापुरुष हैं!
अयोध्या के श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय महापुरुष हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि मोदी राज में जो चल रहा है उसे देखते हुए यह कहना समीचीन है। चंपत राय की देखरेख में ही ट्रस्ट चल रहा था और श्रीराम मंदिर में लूट भी चल रही थी। यही तो मोदी राज की विशेषता है, जो इस देश में भ्रष्टाचार करता है, काली कमाई करता है, लूट मचाता है या लूट मचाने वालों का साथ देता है, वह महापुरुष होता है। ट्रस्ट की मानी जाए तो खलनायक विपक्ष है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी के नेतृत्व में प्रेस कॉन्प्रâेंस हुई। उसमें दो बातें उभर कर सामने आर्इं। पहले चंपत राय को बचा लिया गया है। उनका इस्तीफा तो स्वीकार कर लिया गया, पर उन पर कोई एक्शन नहीं होगा। दूसरी बात यह है कि विपक्ष पर प्रहार किया गया। यदि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी की बातों पर गौर करें तो उनके शब्द उनके लहजे और भाजपा नेताओं के शब्दों में कोई फर्क नहीं है। मजाक बनाकर रख दिया है। इतना बड़ा घोटाला हुआ और पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया। गोविंद गिरी ने चंपत राय पर पूछे गए सवालों को ही अनसुना कर दिया। जब गोविंद गिरी से पूछा गया कि राम मंदिर में घोटाला हुआ तो कहते हैं कि चंपत राय से पूछिए। गोविंद गिरी जी आप तो कोषाध्यक्ष हैं। एक तरफ गोविंद गिरी चंपत राय को महापुरुष कहते हैं, जब चंपत राय पर सवाल पूछा जाता है तो कहते हैं। उनसे पूछिए। पूरी तरह छलावा। प्रेस कॉन्प्रâेंस पूरी तरह छलावा थी। अब हम आप पर छोड़ रहे हैं कि जो डवैâती कर रहे हैं वे दोषी हैं या जो सवाल पूछ रहे हैं वे दोषी हैं।

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