अरुण कुमार गुप्ता
इसी महीने ३ जुलाई को मोदी सरकार ने ६ ऑटो मैन्युपैâक्चरिंग कंपनियों को बुलाया और कहा कि तुम प्रेस कॉन्प्रâेंस करो और कहो कि ई-२० पेट्रोल का उपयोग ठीक है, इससे कोई नुकसान नहीं है। यह ६ कंपनियां हैं मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटर्स, बजाज ऑटो, हुंडई और टीवीएस। इन ६ कंपनियों को बोला गया कि तुम प्रेस कॉन्प्रâेंस करो और लोगों को बताओ कि ई-२० पेट्रोल सही है। यदि आप की गाड़ी की ई-१० है तो भी ई-२० पेट्रोल उपयोग किया जा सकता है। इन ६ कंपनियों में से तीन कंपनियों ने सीधा मना कर दिया कि हम इतना बड़ा झोल नहीं कर सकते। बाकी तीन कंपनियों ने झूठ बोला। इन तीन कंपनियों में मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटर ने सरकार के आदेशों का पालन किया था और प्रेस कॉन्प्रâेंस करते हुए इन कंपनियों ने झूठ बोला कि यदि आपका वाहन जीरो है, ई-५ है, ई-१० है तो भी आप ई-२० पेट्रोल डाल सकते हैं। इन कंपनियों ने यह भी कहा कि थोड़ी बहुत माइलेज कम होगी, लेकिन कोई नुकसान नहीं होगा। अब इनका झूठ पकड़ा गया है। जब ये कंपनियां किसी व्यक्ति को गाड़ी बेचती हैं तो ओनर मैन्युअल देती हैं। ओनर मैन्युअल में पेट्रोल व अन्य बातें बिल्कुल साफ लिखी रहती हैं। टोयोटा कंपनी अपने ओनर मैन्युअल में कहती है कि सर्वाधिक १० प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपयोग किया जा सकता है। वहीं मारुति सुजुकी अपने ओनर में मैन्युअल में भी यही बात करती है कि सर्वाधिक १० प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपयोग किया जा सकता है। यदि इससे कोई गड़बड़ी होती है तो इसे भी बंद किया जाए, लेकिन यही कंपनियां सरकारी प्रेस कॉन्प्रâेंस कर लोगों को बेवकूफ बना रही हैं। अब आप सोचिए, देश के लोगों को वैâसे गुमराह किया जा रहा है। वैâसे ‘गेंडा’ करी के बेटों की कंपनियों को प्रमोट किया जा रहा है। सरकार मोटर मैन्युपैâक्चरिंग कंपनियों को वैâसे मैनेज कर रही है। आगे की बात सोचना आप पर छोड़ रहा हूं।
लूट के लिए भाजपा को चाहिए विपक्षुमक्त भारत
पूरे देश को पता है कि दिल्ली की सरकार में ६५० करोड़ रुपए का मेडिकल घोटाला हुआ है। लेकिन दिल्ली के एलजी, ईडी और सीबीआई कहीं नीद की गोली खाकर सो गए हैं। आपको याद होगा जब अरविंद केजरीवाल की सरकार में शराब नीति बनाई गई थी तो इसी एलजी ने दिन-रात एक करके उस पॉलिसी को शराब घोटाले का रूप दे दिया था और सीबीआई जांच बैठा दी थी। लेकिन अब दिल्ली सरकार में मेडिकल घोटाला हुआ है तो ईडी, सीबीआई और एलजी का कुछ पता नहीं। सिर्फ खानापूर्ति के लिए एसीबी की जांच बैठा दी है। इस मेडिकल घोटाले का मास्टरमाइंड राजीव रंगीला का पता नहीं है। राजीव रंगीला को एसीबी अभी तक ट्रैक नहीं कर पाई है। इस मामले में पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि सरकार राजीव रंगीला को पकड़ना ही नहीं चाहती या फिर देश से बाहर भगा दिया गया है। सीबीआई ने एक झटके में मनीष सिसोदिया को झूठे शराब घोटाले में गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन इस मेडिकल घोटाले में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह से पूछताछ तक नहीं हुई है, गिरफ्तारी तो बहुत दूर की बात है। इस मेडिकल घोटाले में अभी तक ना तो सीबीआई और ना ही ईडी की एंट्री हुई है। जैसे कोई घोटाला ही नहीं हुआ। जब केजरीवाल की सरकार थी तो शराब कारोबारी को तुरंत हिरासत में लेकर उन्हें ब्लैकमेल कर जबरन मनचाहे बयान लिए गए थे, ताकि केजरीवाल को गिरफ्तार किया जा सके। जब ईडी वाले मामले में केजरीवाल को जमानत मिली तो सीबीआई रिहा होने से पहले केजरीवाल को गिरफ्तार करने जेल पहुंच गई थी और दूसरा केस बनाकर केजरीवाल को दोबारा जेल में ही गिरफ्तार कर लिया गया। यहां तक केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के स्टाफ को भी डरा-धमकाकर बयान लिया गया, ताकि इस शराब पॉलिसी को घोटाला साबित किया जा सके। इस समय भाजपा सरकार में सचमुच में मेडिकल घोटाला हुआ है तो ईडी और सीबीआई पता नहीं किस बिल में छुप गए हैं या छुपा दिए गए हैं। एलजी साहब तो पिक्चर में भी नहीं है। संदेश साफ है कि भाजपा सरकार में लूट खुलकर होगी, चाहे वह गरीबों के लिए बने अस्पताल हो या हिंदुओं के लिए बने मंदिर हो। यही बीजेपी का विकास मॉडल है। इसके लिए ही भाजपा को विपक्षमुक्त भारत चाहिए।
