अनिल तिवारी
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की चेतावनी नई नहीं है, लेकिन इस बार ट्रंप प्रशासन इसे केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा संकट के रूप में पेश कर रहा है। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने से खाड़ी क्षेत्र और दुनिया में परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है। इसी आधार पर ट्रंप भी दोहरा रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता।
अमेरिका के पास पहला विकल्प कूटनीतिक समझौता है। ओमान जैसे मध्यस्थों के जरिए बातचीत, प्रतिबंधों में आंशिक ढील और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की कड़ी निगरानी के बदले ईरान से संवर्धन रोकने या सीमित करने की मांग की जा सकती है। यह सबसे कम खर्चीला रास्ता है, लेकिन इसकी कमजोरी यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुरक्षा कवच मानता है।
दूसरा विकल्प आर्थिक दबाव है। ट्रंप फिर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति अपना सकते हैं, तेल निर्यात, बैंकिंग, शिपिंग और तकनीकी आपूर्ति पर कठोर प्रतिबंध। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है, लेकिन इतिहास बताता है कि प्रतिबंध शासन को झुकाने के बजाय कई बार उसे और कठोर बना देते हैं।
तीसरा विकल्प सीमित सैन्य हमला है। अमेरिकी नेतृत्व संकेत दे रहा है कि यदि डील नहीं हुई तो ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल ढांचे या सैन्य प्रतिष्ठानों पर फिर हमला किया जा सकता है। ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिका को ईरान पर ‘और कड़ा प्रहार’ करना पड़ सकता है, हालांकि उन्होंने बातचीत की संभावना भी खुली रखी है। लेकिन यही विकल्प सबसे जोखिमभरा है। ईरान जवाब में खाड़ी में अमेरिकी अड्डों, इजरायल, तेल मार्गों या होर्मुज जलडमरूमध्य को निशाना बना सकता है। तेल कीमतें, महंगाई और वैश्विक बाजार तुरंत प्रभावित होंगे। ट्रंप ने गैस कीमतों की चिंता को परमाणु खतरे के सामने ‘छोटी बात’ बताया, पर जनता के लिए महंगाई कोई छोटी बात नहीं होती।
इसलिए ट्रंप का असली ‘ट्रंप कार्ड’ बम नहीं, बल्कि धमकी, प्रतिबंध और समझौते का संयुक्त दबाव है। समस्या यह है कि अगर धमकी बार-बार दी जाए और निर्णायक रणनीति न दिखे, तो वह नीति नहीं, राजनीतिक शोर लगने लगती है। अमेरिका ईरान को रोक सकता है, पर युद्ध छेड़े बिना रोकना ही उसकी असली परीक्षा है।
ट्रंप प्रशासन की ईरान को दी गई चेतावनी के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव और कूटनीति, दोनों साथ-साथ चलते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ईरान के साथ परमाणु वार्ता अब निर्णायक चरण में है और यदि तेहरान समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो अमेरिका ‘कठोर और अप्रिय’ कदम उठा सकता है। इसके जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति को ही स्थायी समाधान बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने दायित्वों का सम्मान किया है और किसी देश को दबाव या बल से झुकाने की नीति भ्रमपूर्ण है। इसी तनावपूर्ण माहौल में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में अचानक तेजी आई है। बताया जा रहा है कि ईरान ने कुछ प्रतिबंधों में ढील देकर जहाजों के लिए नया मार्ग खोला है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी के अनुसार, पिछले २४ घंटों में तेल टैंकरों और कंटेनर जहाजों सहित २६ वाणिज्यिक जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई। यह संकेत है कि तेहरान दबाव के बीच भी आर्थिक मार्ग खुले रखना चाहता है, जबकि अमेरिका सैन्य और कूटनीतिक दबाव बनाए हुए है।
