– दिल की बीमारी, दिमाग का गुस्सा: देश में क्या है बढ़ते क्राइम का सच?
– कम हुई सामाजिकता ने बढ़ाया क्राइम का आंकड़ा?
खुशबू सिंह
सवाल ये है कि क्या भारत में बढ़ते क्राइम के पीछे सिर्फ अपराधी मानसिकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरटेंशन और घटती सामाजिकता इसके बड़े कारण हो सकते हैं।
दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में एक सनसनीखेज डबल मर्डर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। एक घर के अंदर मां और बेटे की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। जांच में पता चला कि मालकिन के डांटने से नाराज नौकर ने बेटे सहित उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने नौकर को गिरफ्तार कर लिया है।
सोचनेवाली बात है कि ऐसा शायद कोई दिन नहीं, जिस दिन रेप, मर्डर और सुसाइड जैसे दिल दहला देनेवाली खबरें न आती हों। दूसरों की बात तो छोड़िए मां-बाप द्वारा बच्चे की हत्या, बच्चों द्वारा मां-बाप की हत्या। शादी के बाद पति की हत्या। नौकर द्वारा मालिक की हत्या। न जानें ऐसी कितनी वारदातें हैं, जो आम लोगों के दिलो-दिमाग को झकझोर कर रख देती हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या भारत में बढ़ते क्राइम के पीछे सिर्फ अपराधी मानसिकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरटेंशन और घटती सामाजिकता इसके बड़े कारण हो सकते हैं।
हाइपरटेंशन: गुस्से का ट्रिगर?
हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ दिल को ही नहीं, बल्कि दिमाग को भी प्रभावित करता है। इससे चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ता है, जो कभी-कभी हिंसक अपराधों में बदल जाता है। माता-पिता द्वारा बच्चों की हत्या से लेकर पति-पत्नी के बीच हिंसा तक, हाइपरटेंशन से ग्रसित लोग तनाव में खतरनाक कदम उठा सकते हैं।
क्राइम क्यों बढ़ रहा है?
३० साल से अधिक उम्र का हर आठवां व्यक्ति हाइपरटेंशन से जूझ रहा है। काम का बोझ, महंगाई और घटती सामाजिकता ने लोगों को अकेलेपन की ओर धकेल दिया है। दिल की बात दिल में दबने से चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जो कई बार अपराध का रूप ले लेता है। योग, सही खान-पान, पूरी नींद और अपनों से मेलजोल इस समस्या को कम कर सकता है।
क्या है इसका समाधान?
क्राइम और तनाव को रोकने के लिए जरूरी है कि लोग अपनों के साथ समय बिताएं, अपनी बात दूसरों के साथ साझा करें और सामाजिक बंधन मजबूत करें। स्वस्थ जीवनशैली और प्यार भरे रिश्ते न सिर्फ दिल को बचाएंगे, बल्कि अपराधों को भी कम कर सकते हैं।
