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संपादकीय : भाजपा की सुन्नत!

हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे की आलोचना करने का भाजपा कोई मौका नहीं छोड़ती। ये लोग लगातार स्यापा करते रहते हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद शिवसेना का हिंदुत्व नरम पड़ गया है। अब यह खुलासा हुआ कि इसी भाजपा ने महाराष्ट्र के कुछ नगरपालिका में कांग्रेस के साथ और कुछ जगहों पर ओवैसी मियां की एआईएमआईएम के साथ निकाह किया। जब इस लफड़े को लेकर काफी हो-हल्ला मचा तो देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस से डाइवोर्स करवाया और एआईएमआईएम से ‘तलाक तलाक तलाक’ करवाकर भाजपा को शुद्ध करने की कोशिश की, लेकिन तब तक जितनी इज्जत धूल में मिलनी थी, मिल ही चुकी थी। महाराष्ट्र में भाजपा की हालत, ‘जो बूंद से गई वो हौद से नहीं आती’ सी हो गई है। अकोट में भाजपा ने एआईएमआईएम के साथ खुलेआम निकाह किया और इसके लिए खुद की सुन्नत भी करवा ली। वहीं दूसरी ओर, अंबरनाथ नगरपालिका में शिंदे गुट को कमजोर करने के लिए उसने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया। ये सभी लफड़े पहले गुप्त रूप से चल रहे थे। इसके लिए लेन-देन, सौदेबाजी, गले मिलना सब कुछ हुआ, लेकिन किसी ने भाजपा के शीर कूरमा में नमक डाल दिया। इसलिए मुख्यमंत्री फडणवीस को स्पष्टीकरण देने के लिए नाकों चने चबाने पड़े और बुधवार शाम को उन्हें यह घोषणा करनी पड़ी कि ‘इस तरह के अनुचित गठबंधन बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। ऐसा करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’ अब क्या कार्रवाई होगी? तो अकोट के भाजपा विधायक भारसाखले को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने अंबरनाथ में अपने नगरसेवकों को निलंबित कर दिया। उन्हें कड़ी चेतावनी दी गई थी कि भाजपा के साथ गठबंधन नहीं चलेगा। लेकिन अब इन सबका मतलब यह है कि बारह में से बारह नगरसेवक सीधे भाजपावासी हो गए हैं। यह सब बेहद भयावह है। फिलहाल
भाजपा का सिद्धांत
सत्ता के लिए किसी भी स्तर तक गिर जाने का बन गया है। हालांकि, उस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चव्हाण के ताव कुछ और ही हैं। अकोट के भाजपा विधायक भारसाखले को जारी नोटिस में प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा, ‘आपने ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन करके भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतों को ठेस पहुंचाई है।’ चव्हाण की दूसरी आपत्ति यह है कि ‘आपने इस गठबंधन को करते समय किसी को भी विश्वास में नहीं लिया।’ भाजपा का नोटिस एक मजाक है। असल में, अगर आपके सिद्धांत अभी भी कायम होते तो ही सिद्धांतों को ठेस पहुंचाई जा सकती थी! पार्टी में असंख्य गुंडों और गिरोहों की भर्ती करते हुए, उन्हें चुनाव में उतारकर और उनके लिए प्रचार करते हुए इस मंडली को पार्टी के सिद्धांतों की याद नहीं आई। वास्तव में सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा का सिद्धांत गुंडों और भ्रष्ट लोगों को भर्ती करके सत्ता हासिल करना बन गया है? इसमें कोई आश्चर्य की बात ही नहीं है कि भाजपा ने अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया या उसके सभी निलंबित नगरसेवकों के भाजपा में शामिल होने के रास्ते खोल दिए। मोदी ने ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ का नारा दिया था, लेकिन भाजपा की स्थिति अब कांग्रेसयुक्त भाजपा बन गई है। भाजपा ने कांग्रेस नेताओं के लिए कालीन सजाई और पूरी कांग्रेस को अपने पेट में समाहित कर लिया। मोदी-शाह ने कांग्रेस के सभी भ्रष्ट नेताओं को भाजपा में शामिल कर लिया है। चूंकि इनके खुद के बच्चे कर्तव्यनिष्ठ नहीं हो रहे हैं इसलिए ये दूसरों के पालने के बच्चों को पुचकार रहे हैं या दूसरे के बच्चों को अगवा कर रहे हैं। भाजपा ने अब इस सिद्धांत को अपना लिया है। अगर यही स्थिति है तो अंबरनाथ में भाजपा की राजनीति को भी इसी नजरिए से देखना चाहिए।
भाजपा कांग्रेस बन ही
चुकी है। इसलिए मुसलमानों के प्रति भाजपा का रवैया भी उतना ही ‘विधायी’ हो गया होगा। उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के सभी चुनावों में भाजपा ने बार-बार ‘एआईएमआईएम’ यानी मियां ओवैसी की गुपचुप मदद ली। ओवैसी वोटों को बांटने के लिए भाजपा के काम आते ही रहते हैं। अब पेड़ के पीछे का यह रोमांस सबके सामने आ गया है। यह भाजपा का नया सत्ता पैटर्न है। भाजपा की मानसिकता यह है कि सत्ता के लिए वे जो चाहें करेंगे, लेकिन चाहे कुछ भी हो जाए वे विपक्ष में नहीं बैठेंगे। भाजपा के ८० फीसदी विधायक, सांसद, नगरसेवक आदि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस या शिवसेना से आयात किए गए हैं और ये सभी गिरोह हिंदुत्व के प्रति अपनी वफादारी का घिनौना प्रदर्शन करते रहते हैं। एक भाजपा मंत्री, जो कल तक कांग्रेस का झंडा लेकर हिंदुत्व और सावरकर को गाली देता था, कहता है, ‘अगर मैं राजनीति से थक जाऊं, तो संघ प्रचारक के रूप में काम करूंगा।’ यानी, भाजपा का कांग्रेसीकरण करने के बाद, ये लोग संघ को भी कांग्रेसी रंग में रंग देंगे! यह अच्छा ही हो गया है। लगता है इसकी शुरुआत एक मुस्लिम पार्टी से निकाह करने से हुई। अगर अब ओवैसी महाराष्ट्र में आकर ‘बांग’ देकर निकलें तो समझिए कि भाजपा ने चुनाव की तैयारी शुरू कर ली है। भारतीय जनता पार्टी की अपनी कोई ाfवचारधारा नहीं है। उनका हिंदुत्व आदि एक ढोंग है और सत्ता के लिए साधा गया स्वार्थ। चूंकि भाजपा के पास अपना कुछ नहीं है, इसलिए उन्हें दूसरी पार्टियों से नेता और युगपुरुष चुराना पड़ता है। सत्ता का सुख न मिलने पर वे लोग तड़पते दिखाई देते हैं। इसलिए उन्हें सेज पर ओवैसी की पार्टी भी स्वीकार है। भाजपा ने पहले सत्ता के लिए ‘बांग’ दिया। फिर निकाह किया। सुन्नत भी की, लेकिन काजी के ‘आयत’ थोड़ा जोर से पढ़ लेने से भाजपा का यह लफड़ा पूरी दुनिया में पैâल गया। धन्य है यह ढोंगी पार्टी!

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