मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : हे महाराष्ट्र की जनता!

संपादकीय : हे महाराष्ट्र की जनता!

आज जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें पैसों की भारी बर्बादी और सत्ता के नशे का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र राज्य भ्रष्टाचार से कलंकित हो चुका है और इस गंदगी को साफ करने की क्षमता सत्ताधारियों में नहीं है, जैसा कि मुंबई समेत २९ नगरपालिका के चुनाव प्रचार में स्पष्ट हो गया। इन सभी नगरपालिका के लिए आज मतदान होगा। मुंबई, ठाणे, नासिक, नागपुर, पुणे, छत्रपति संभाजीनगर प्रमुख महानगरपालिका हैं, लेकिन पूरे देश की नजर मुंबई पर है कि मुंबई में क्या होगा? यह शायद पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर के मुख्यमंत्री योगी महाराज के चरण कमल मुंबई को नहीं छुए। क्योंकि दिल्ली को समझ में आ गया कि मुंबईकरों के मन में क्या चल रहा है और शर्मिंदगी से बचने के लिए इन सभी ने मुंबई आने से परहेज किया। मुंबई-ठाणे की लड़ाई मूलरूप से मराठी लोगों के अस्तित्व और उनके न्यायसंगत अधिकारों के बारे में भी है। मुंबई संकट में है। इसलिए मराठी लोगों का अस्तित्व संकट में है। अत: यह लड़ाई मराठी मानूस की एकता का है। हमें शाहिर अमरशेख की बुलंद पोवाड़ा की एक पंक्ति याद आती है…
‘बा, महाराष्ट्रा!
इभ्रत तुझी ही हिर्षेला पडली,
काढा नवका बाहेर,
शिवरायांची मुंबई,
वादळात शिरली!
यह सच है। महाराष्ट्र के गद्दारों के तूफान का झटका मुंबई को लग रहा है। मुंबई मानूस की एकजुटता मुंबई ही नहीं महाराष्ट्र में भी कहीं भी न टिक पाए इसलिए
भाजपा और उसकी शाहसेना
हर तरह के हथियार इस्तेमाल कर रही है। यह सब मुंबई समेत महाराष्ट्र की मराठी पहचान को मिटाने के लिए किया जा रहा है। इसीलिए मुंबई समेत राज्य के हर नगरपालिका के चुनाव मराठी लोगों के अस्तित्व की लड़ाई बन गए हैं। पिछले महीने राज्य में नगरपालिका और नगर पंचायतों के चुनाव हुए। सत्ताधारी दल द्वारा खेला गया धन और सत्ता के दुरुपयोग का वही खेल २९ नगरपालिका के चुनावों में भी खेला गया। नगरपालिका चुनावों में भी ७० स्थानों पर ‘निर्विरोध’ चुनाव का ‘घोटाला’ किया गया। मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद, बीच के दो दिनों में सत्ताधारी दलों ने अलग-अलग जगहों पर ‘रात में खेल खेलने’ का प्रयोग किया। कहीं वॉशिंग मशीन बांटी गईं, कहीं चांदी के कटोरे बांटे गए, तो कहीं चुनाव प्रचार पर्चों के साथ पैसे के पैकेट बांटे गए। कुछ जगहों पर तो रंगेहाथों पकड़े गए। इसमें हमेशा की तरह चुनाव आयोग भी सत्ताधारी दल की मदद करता नजर आया। चुनाव प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद भी घर-घर जाकर प्रचार करने की अनुमति दी गई। आयोग द्वारा नियमों का इस प्रकार उल्लंघन करना भयावह और गंभीर है। मुंबई में कृपाशंकर और अन्नामलाई जैसे लोगों को जानबूझकर महाराष्ट्र विरोधी नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने मराठी, अमराठी-गैर मराठी विवाद को हवा देकर राजनीतिक आग को भड़काकर अपनी राजनीति की रोटियां सेंकने की कोशिश की। मराठी जनता को भाजपा की इस चाल और रणनीति को पहचानते हुए आज मतदान के लिए बाहर आना चाहिए। मराठी जनता को इस दृढ़ संकल्प के साथ अपना वोट डालना चाहिए ताकि भाजपा की महाराष्ट्र विरोधी राजनीति को हमेशा के लिए कुचल दिया जाए।
आज नहीं तो कभी नहीं
इस तरह की यह नगरपालिका चुनाव की लड़ाई है। चाहे भाजपा हो या मिंधे, सभी को अपनी औकात दिखानी है और इसके लिए आज के मतदान से बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता। आज का मतदान मुंबई-महाराष्ट्र और मुंबई में रहनेवाले मराठी मानूस, उनकी भाषा और संस्कृति के लिए एक आर-पार की लड़ाई है। आज का दिन उन शासकों को करारा प्रहार करने का है जो महाराष्ट्र के शौर्य और मराठी मानूस का लगातार दमन कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि उन लोगों को सत्ता से बेदखल किया जाए जो महाराष्ट्र के उद्योगों और नौकरियों को गुजरात ले जा रहे हैं और जो मराठी वड़ापाव का मजाक उड़ाते हुए मराठी अस्मिता को खत्म करने पर तुले हैं। यह मौका है उन लोगों की आंखों में मराठीपण का तीखा अंजन डालने का जो मुंबई के महापौर के रूप में अमराठी को बनाने का सपना देखते हैं। ‘जो चूक गया वह खत्म हो गया!’ मराठी जनता को इस दृढ़ निश्चय के साथ अपना वोट डालना चाहिए कि ‘आज मैं गलती नहीं करूंगा, मैं नहीं चूकूंगा।’ मतदान एक अधिकार है, लोकतंत्र द्वारा दिया गया एक अचूक हथियार है। हे मराठी मानूस, आज आपको मुंबई, महाराष्ट्र और मराठी जनता पर साजिशन राज कर रही सत्ताधारी पार्टियों के खिलाफ इस अचूक हथियार का इस्तेमाल करना है। आज का मतदान मराठी के अस्तित्व की लड़ाई है और इसे जीतना ही होगा। मराठी मानूस, अपने मतदान के हथियार को उठाओ और खत्म कर दो अराजकता! शुक्रवार को, मराठी जनता की एकता का शुभ मंगल कलश मुंबई में अवतरित होगा और संयुक्त महाराष्ट्र संघर्ष के १०६ शहीद उस पर फूल बरसाएंगे, हमें इसमें कोई संदेह नहीं है।

अन्य समाचार