मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय :  ममता की छापेमारी!.. एक ही मारा, लेकिन जबरदस्त लगी

संपादकीय :  ममता की छापेमारी!.. एक ही मारा, लेकिन जबरदस्त लगी

पश्चिम बंगाल में अगले चार महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने दहाड़ लगाई है, `इस बार पश्चिम बंगाल जीतेंगे यानी जीतकर ही रहेंगे!’ दूसरे शब्दों में कहें तो जिस तरह बिहार में तेजस्वी यादव को निपटाकर, लपेटकर रख दिया, उसी तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निपटाने की साजिश उलटे अमित शाह और भाजपा पर ही भारी पड़ गई है और इसके लिए बंगाल की शेरनी ममता दीदी का जितना अभिनंदन किया जाए वह कम है! अमित शाह ने विशेष निर्देशों के साथ `ईडी’ की एक विशेष टीम को कोलकाता भेजा। भाजपा के इशारे पर नाचने वाली `ईडी’ ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के दो ठिकानों पर छापा मारा, जो तृणमूल कांग्रेस की चुनावी स्ट्रैटेजी, सर्वेक्षण आदि का काम करती है। `ईडी’ का कहना है कि वह २०२० के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। `ईडी’ टीम ने `आई पैक’ के निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा और तृणमूल कांग्रेस द्वारा चुनाव के लिए शुरू किए गए सर्वेक्षण की फाइलें जब्त कीं। प्रतीक जैन ने विधानसभा चुनाव के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए अलग-अलग `स्ट्रैटेजी’ तैयार की थी। वह स्वयं तृणमूल के आईटी सेल के प्रमुख हैं। भाजपा ने `ईडी’ को आगे करते हुए तृणमूल की चुनाव जीतने की मेहनत और योजनाओं को बर्बाद करने के लिए यह हथकंडा अपनाया, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घायल शेरनी की तरह प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और `ईडी’ अधिकारियों के हाथों से पार्टी की सभी फाइलें छीन लीं। अमित शाह के नियंत्रण में काम करने वाली `ईडी’ बार-बार अपनी ही इज्जत की धज्जियां उड़वा रही है। कोलकाता में `आई-पैक’ छापे के मामले में भी `ईडी’ का नकाब उतर गया। ईडी का दावा है कि २०२२ के गोवा विधानसभा चुनावों में
`आई-पैक’ को अवैध तरीके से
पैसे मिले हैं। हम उसकी जांच कर रहे हैं। तो फिर २०२२, २०२३, २०२४ और २०२५ तक `ईडी’ क्या कर रही थी? चार साल बीत चुके हैं। `ईडी’ ने कभी इसकी जांच नहीं की, लेकिन जैसे ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आए, `ईडी’ को २०२२ में गोवा में खर्च किए गए पैसों की जांच याद आ गई और उसने छापे मारे। यह इस बात का सबूत है कि `ईडी’ भाजपा की कठपुतली है। पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए भाजपा द्वारा अपनाया गया तरीका अलोकतांत्रिक और भ्रष्ट है। भाजपा ने महाराष्ट्र और बिहार में भी इसी तरह चुनाव जीते हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके चुनाव जीतना एक तरह की कायरता है। अमित शाह और उनकी पार्टी ने बार-बार यही रास्ता अपनाया है। ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय भाजपा की जीत के चार स्तंभ हैं। जब भारतीय लोकतंत्र का इतिहास लिखा जाएगा तो इन चार स्तंभों का काला इतिहास दर्ज करना ही पड़ेगा, लेकिन ममता बनर्जी ने अजगर के मुंह में हाथ डालकर चुनाव की जब्त वस्तुएं छीन लीं और `ईडी’ अधिकारियों की घुसपैठ के खिलाफ मामले दर्ज कराए। अमित शाह के भीड़तंत्र को बंगाल की शेरनी ने करारा तमाचा मारा। भाजपा की मीनार इसी तरह के धोखे और साजिशों पर टिकी है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक बात खूब वायरल हुई कि नब्बे के दशक में नियमित रूप से `ड्रग्ज’ का सेवन करने वाले नशेड़ियों पर कोई ड्रग्ज का असर नहीं होता था, तब ये लोग घंटों सांप के बिल में हाथ डालकर बैठे रहते थे। सांप उन्हें काट लेता था और वे नशे में चूर हो जाते थे। उस दौरान कई लोगों ने इस वजह से अपनी जान गंवाई। ठीक यही घटना कल बंगाल में हुई।
`ईडी’ को सत्ता का नशा
इस कदर चढ़ा कि उसने सांप के बिल में हाथ डाल दिया, लेकिन बिल में एक किंग कोबरा जाति की नागिन थी। उस नागिन ने जोरदार डंक मारा है। ममता दीदी ने कहा है, `अगर आप हमारे घर में चोरी करने के इरादे से घुसेंगे, तो हम पलटवार करेंगे!’ पिछले दस-बारह सालों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने `ईडी’ का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार करने के लिए किया है। इस मामले में उन्होंने वेनेजुएला के मादुरो को भी मात दी। उन्होंने राज्यों, चुनी हुई सरकारों और मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए `ईडी’ का इस्तेमाल किया। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो, (एसीबी) के कार्यालय में केंद्रीय सशस्त्र बल घुसाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया। सीबीआई के कार्यालय में दिल्ली पुलिस को घुसाकर सीबीआई मुखिया को बंदी बना लिया गया। ये इसलिए किया गया, क्योंकि मोदी-शाह को राफेल भ्रष्टाचार मामले की फाइल चाहिए थी। अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलते ही शाह ने तुरंत सीबीआई को केजरीवाल के खिलाफ नया मामला दर्ज करने का आदेश दिया। केजरीवाल को जेल से न निकलने देने के लिए यह खेल खेला जा रहा था। पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक की गैर-भाजपा सरकारों पर और उससे पहले महाराष्ट्र में विपक्षी दलों और नेताओं पर केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा लगातार दबाव बनाया गया। गैर-भाजपा मुख्यमंत्री केजरीवाल और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया गया। लेकिन साथ ही `ईडी’ ने कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना के उन सभी भ्रष्ट और विवादित नेताओं को क्लीनचिट दे दी, जो भाजपा में शामिल हो गए। ममता बनर्जी ने `ईडी’ को सबक सिखाने का काम बखूबी किया। बंगाल चुनावों से पहले कोलकाता में `एआई-पैक’ पर छापा अमित शाह स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स का उदाहरण है। ममता बनर्जी उस स्कूल में घुसीं और हेड मास्टर के गाल पर एक जोरदार तमाचा मारकर बाहर निकल गर्इं। यह तो बस शुरुआत है!

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