जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वीकारा कि पहलगाम हमला सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में एक चूक थी। पहलगाम हमले को तीन महीने हो चुके हैं। आतंकवादियों द्वारा पर्यटकों पर किए गए हमले में २६ लोगों ने जान गंवाई। आतंकवादियों ने महिला पर्यटकों पर गोली नहीं चलाई थी। उन्होंने पुरुषों को मारा। उन्होंने धर्म पूछकर मार डाला। कुरान की आयतें सुनाने को कहा। जो नहीं सुना पाए उन्हें गोली मार दी गई, यह कहानी बाद में भाजपा भक्तों द्वारा फैलाई गई। पहलगाम हमले के निमित्त हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव बढ़ाने की कोशिश की गई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पहलगाम हमले के बाद स्थानीय लोगों ने वहां सभी पर्यटकों और घायलों की मदद करने में उदारता दिखाई। उन्होंने हर तरह की मदद की। खुद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा, लेकिन इतना भयंकर यह सब कैसे हुआ? सरकार अब तक इस पर मुंह सिले बैठी थी। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सिन्हा ने अब हमले के पीछे की सच्चाई उजागर की है, जो यह है कि सरकार की ओर से पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था नजरअंदाज हुई। सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की वजह से ही आतंकवादी पर्यटनस्थल तक पहुंच पाए और हमला हुआ। राज्यपाल का यह सच चौंकानेवाला है और देश के गृह मंत्रालय की इज्जत चौराहे पर टंग गई। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा छीन लिया इसलिए जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्रशासित प्रदेश है जिसकी वजह से इस बेहद संवेदनशील राज्य की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ही, यानी गृह मंत्रालय पर है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी
सरकार के पंख कतर कर
सर्वाधिकार राज्यपाल मनोज सिन्हा को दिया गया था। राज्यपाल के जरिए ही गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर राज्य का शासन चलाते हैं इसलिए पहलगाम में हुए हमले और २६ निर्दोष हत्याओं की जिम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह पर ही है। राज्यपाल सिन्हा ने भी यही कहा। गृह मंत्री शाह इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं ही, लेकिन इससे भी गंभीर बात यह है कि गृह मंत्रालय अभी तक हत्या करनेवाले ‘आरोपियों’ को पकड़ नहीं पाया है। २६ लोगों की हत्या करनेवाले हत्यारे अभी भी ‘फरार’ हैं। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा को अब एक मिनट भी अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। वे २६ लोगों की हत्या के जिम्मेदार तो हैं ही, और वे हत्या के आरोपियों को भी नहीं पकड़ पाए हैं। इस महान बहादुरी के लिए क्या शाह और सिन्हा की पूजा की जानी चाहिए? या उन्हें वीरता पदक से सम्मानित किया जाना चाहिए? चूंकि राज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वयं स्पष्ट किया है कि पहलगाम हमला एक सुरक्षा चूक थी इसलिए शासकों को प्रायश्चित करना ही होगा और खुले तौर पर गृह मंत्री का इस्तीफा मांगना होगा। यह पूरा मामला गैर इरादतन हत्या का ही मामला है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर राजनीति करनेवालों को इस पर ध्यान देना चाहिए। नरेंद्र मोदी और अमित शाह व्यापारिक मानसिकता वाले लापरवाह राजनेता हैं। यह लापरवाही मणिपुर से लेकर कश्मीर तक हर रोज दिखाई देती है। पहलगाम में भी सुरक्षा को लेकर वैसी ही लापरवाही देखने को मिली जैसी २०१९ में पुलवामा हमले में ४० भारतीय जवानों के शहीद होने पर दिखी थी। १४ फरवरी २०१९ को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में
जवान शहीद
हुए थे। केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों को श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के अवंतीपोरा के पास लेथापोरा में वाहन द्वारा ले जाया जा रहा था। ७८ वाहन और २,५०० से अधिक जवान थे। ३०० किलो आरडीएक्स विस्फोटक से लदी एक स्कॉर्पियो गाड़ी ने जवानों के वाहनों पर आत्मघाती हमला किया और ४० जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इससे पूरा भारत हिल गया था। ये जवान सरकार की लापरवाही और मनमानी के कारण ही मारे गए थे। जवानों के काफिले पर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हमला हो सकता था। खुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी थी कि सड़क मार्ग से जवानों को ले जाना खतरनाक है, लेकिन गृह मंत्रालय बेखबर रहा। जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जवानों के लिए एक विमान की मांग की थी। गृह मंत्रालय ने इस मांग को खारिज कर दिया और बाद में जैश-ए-मोहम्मद ने ‘पुलवामा’ हत्याकांड को अंजाम दिया। इसका मतलब है कि गृह मंत्रालय निकम्मा साबित हुआ या जैश-ए-मोहम्मद का कोई अहमद गृह मंत्रालय की गोद में बैठा है। इन सारे घटनाक्रमों का सारांश यही है कि पुलवामा और पहलगाम हत्याकांड सरकार की लापरवाही के कारण हुए। तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक और वर्तमान राज्यपाल मनोज सिन्हा ने हत्याकांड की जिम्मेदारी सरकार, यानी कि केंद्रीय गृह मंत्रालय पर डाल दी। जब राज्यपाल कहते हैं कि इन दोनों हत्याकांड की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री की ही है तो गृह मंत्री को इस्तीफा देना ही होगा। मोदी-शाह के राज्य में मणिपुर से लेकर कश्मीर तक लोग चींटियों की तरह मारे जा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह, पहले जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को हटाइए और खुद भी इस्तीफा दें!
