-आधुनिकता के नाम पर संबंधों की मर्यादा, जवाबदेही और नैतिकता कमजोर हो रही है। प्रेम, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकार जरूरी हैं, लेकिन इनके नाम पर विश्वासघात, शोषण और झूठे आरोपों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
समाज में रिश्तों की बुनियाद भरोसे, मर्यादा और सुरक्षा पर टिकी होती है, लेकिन हाल के कुछ मामले इस बुनियाद को झकझोरने वाले हैं। गोरखपुर से आई घटना ने तो हर संवेदनशील व्यक्ति को विचलित कर दिया है। लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा एक व्यक्ति उसी महिला की १९ वर्षीय बेटी को लेकर फरार हो गया, जो उसे ‘पापा’ कहकर पुकारती थी। महिला की आशंका है कि उसकी बेटी के साथ कोई अनहोनी हो सकती है। यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि परिवार और विश्वास के टूटने की दर्दनाक कहानी है।
नोएडा में चचेरे भाई से संबंध के बाद युवती के गर्भवती होने और गर्भपात की दवा से उसकी मौत की घटना भी रिश्तों की मर्यादा पर गंभीर सवाल उठाती है। अलीगढ़ में होने वाले दामाद के साथ सास के भागने और फिर जीजा के साथ चले जाने जैसी घटनाएं रिश्तों को मजाक में बदलती दिखाई देती हैं। फिरोजाबाद में शादी के दिन दुल्हन का नकदी-आभूषण लेकर प्रेमी के साथ चले जाना भी परिवारों की सामाजिक प्रतिष्ठा और भावनाओं पर गहरा आघात है। कानपुर का मामला तो रिश्तों के साथ-साथ कानून के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करता है, जहां साली के आरोप पर जीजा को जेल जाना पड़ा, लेकिन बाद में वह अदालत में बयान से मुकर गई। सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद निर्दोष को राहत मिली, पर उसकी सामाजिक क्षति कौन लौटाएगा? ये घटनाएं बताती हैं कि आधुनिकता के नाम पर संबंधों की मर्यादा, जवाबदेही और नैतिकता कमजोर हो रही है। प्रेम, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकार जरूरी हैं, लेकिन इनके नाम पर विश्वासघात, शोषण और झूठे आरोपों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज को कानूनी जागरूकता के साथ नैतिक चेतना की भी उतनी ही जरूरत है।
