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चढ़ाव चोरी के कोप से उभरते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला सीईओ नियुक्त किया

 मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

चढ़ावा चोरी की चपेट से उभरते हुये श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के व्यवस्थित और प्रभावी संचालन के लिए पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ)नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले मिश्रा अब अयोध्या के राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था को नई दिशा देंगे। ट्रस्ट के गठन में इस बार फिर दिल्ली का दबदबा रहा। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खेमा एक सेवानिवृत्त आईएएस और हनुमानजी के अनन्य भक्त एक आईपीएस अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनवाना चाहते थे।
दोनों बहुत कुशल प्रशासक और ईमानदारी के लिये जाने जाते हैं। लेकिन दिल्ली खेमा देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र स्थित भोपतपुर गांव के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नाम पर अड़ गया था। उन्होंने छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लंबे और गौरवपूर्ण सैन्य करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी और 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया।
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में कमांडिंग-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (सिद्धांत, संगठन एवं प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी भी संभाली। भारत के साथ-साथ अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके मिश्रा को बड़े संगठनों के संचालन, नेतृत्व और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का व्यापक अनुभव है।राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर निर्माण के चरण से आगे बढ़कर व्यवस्थित संचालन और व्यापक धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारी प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न विभागों व एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण होंगी। भारतीय वायुसेना में हासिल उनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक प्रबंधन और बड़े संस्थानों के संचालन का अनुभव राम मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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