श्रीकिशोर शाही
दिल्ली में हुए बम धमाके ने साफ कर दिया है कि आंतकवाद खत्म नहीं हुआ है, बल्कि किसी चर्मरोग की तरह जितना दबाया या मारा जा रहा है, वह उससे ज्यादा आक्रामक होकर उभर रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़े संगठित आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया। यह जैश का नया अपग्रेडेड वर्जन है। इसमें कोई रोडछाप आतंकी नहीं बना है, बल्कि सभी हाइली क्वालिफाइड हैं। टेररिस्टों की यह नई फसल काफी खतरनाक है। यह बताता है कि पढ़ने-लिखने या उच्च शिक्षा प्राप्त कर लेने से कोई विद्वान या ज्ञानी नहीं बन जाता। जो कूड़ा-करकट दिमाग में बचपन में डाल दिया गया वह और ज्यादा बदबूदार हो जाता है। खैर, यह तो हुआ पार्ट वन।
अब आता है इसका पार्ट-टू। फरीदाबाद से अमोनियम नाइट्रेट की एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी। इसे जप्त करके जम्मू-कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन के परिसर में रखा गया था। वहां कुछ दिनों से फोरेंसिक टीम उसका सैंपल लेकर टेस्ट कर रही थी। इसी दौरान शुक्रवार की रात उसमें धमाका हो गया और असमें करीब ९ लोग मारे गए और २० से ज्यादा घायल हो गए। इस विस्फोट का असर तो देखने में दिल्ली धमाके से भी ज्यादा खतरनाक लगा। हर तरफ बस आग ही आग। पहले तो लगा कि कोई आतंकी साजिश है फिर डीजी का बयान आया कि यह एक हादसा है। अब पुलिस की कस्टडी में इस तरह का धमाका कई तरह के सवाल तो पैदा करता ही है। पुलिस और फोरेंसिक की कस्टडी में कोई खतरनाक चीज है तो यही उम्मीद की जा सकती है कि इसकी पूरी सुरक्षा की जाएगी और पूरी सावधानी बरती जाएगी। कम से कम फोरेंसिक टीम से तो इसकी अपेक्षा की ही जा सकती है। वे मामले के विशेषज्ञ लोग होते हैं। आम आदमी को तो पता नहीं होता कि वह चीज कितनी खतरनाक है। पर दिल्ली धमाके के बाद फोरेंसिक टीम को तो पता चल ही गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाथ लगाते ही अमोनिया फट गया, ऐसा नहीं था, बल्कि दो-तीन दिनों से जांच और सैंपल लेने और टेस्ट करने का काम चल रहा था। फिर कोई फोरेंसिक वाला या पुलिसवाला वहां बीड़ी पी रहा था क्या, ऐसा शक करना कहीं अतिश्योक्ति तो नहीं? यानी जिस चीज को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में सावधानी के साथ रखना चाहिए था, उसके साथ कुछ तो गड़बड़ हुइ&? इसका जवाब जितना जल्दी मिले, उतना ही अच्छा! वना& आतंकियों के हौसले और भी बुलंद होंगे!
