– चुनाव आयोग का बैकफुट…दो दिन पुराना आदेश रद्द, नया फरमान लागू
– अब हर बटन दो-दो बार दबेगा, नोटा भी जांच के दायरे में
-उम्मीदवार आएं-न आएं, नहीं रुकेगा मॉक पोल
सामना संवाददाता / मुंबई
मतदान से ठीक पहले ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका ने चुनावी व्यवस्था में जहां खलबली मचा दी है, वहीं नियमों में भी उथल-पुथल कर दी गई है। इसी दबाव के बीच चुनाव आयोग को बड़ा बैकफुट लेना पड़ा और दो दिन पहले जारी आदेश को रद्द कर नया फरमान लागू किया गया। बदले हुए नियमों के तहत अब नोटा सहित हर बटन दो-दो बार दबाकर जांच की जाएगी। इसी के साथ ही उम्मीदवार मौजूद हों या नहीं मॉक पोल किसी भी हालत में नहीं रुकेगा, जबकि पहले मॉक पोल की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर हर चरण को वैâमरे की सख्त निगरानी में रखने का पैâसला किया गया है। यह अचानक किया गया बदलाव साफ संकेत दे रहा है कि मतदान से पहले आयोग ने ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सुरक्षा कवच और कड़ा कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि मनपा चुनावों से ठीक दो दिन पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर उठते सवालों के बीच राज्य चुनाव आयोग ने बड़ा और सख्त पैâसला लिया है। आयोग ने दो दिन पहले जारी किया गया आदेश वापस लेते हुए मई २०१७ का पुराना आदेश भी रद्द कर दिया और उसकी जगह नया संशोधित निर्देश लागू कर दिया है। मतदान से ऐन पहले नियमों में हुए इस बड़े बदलाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सोमवार को आयोग ने सभी विभागीय आयुक्तों, मनपा आयुक्तों और जिलाधिकारियों को यह संशोधित आदेश जारी किया। इससे पहले के आदेश में ईवीएम तैयार करने से पहले कुल मशीनों के १० प्रतिशत पर कम से कम १,००० वोट डालकर मॉक पोल करना अनिवार्य था। अब इस व्यवस्था को खत्म कर पूरी प्रक्रिया को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाया गया है। संशोधित नियमों के अनुसार, ईवीएम तैयार करते समय बैलेट यूनिट पर जितने उम्मीदवार होंगे, हर उम्मीदवार के सामने मौजूद प्रत्येक बटन को कम से कम दो बार दबाकर उसकी कार्यक्षमता की जांच की जाएगी। इस तरह अब कोई भी बटन बिना टेस्ट के नहीं बचेगा।
…तो देखे जाएंगे दोबारा कुल वोट
मॉक पोल के दौरान पहले टोटल बटन दबाकर कुल वोट देखे जाएंगे, फिर क्लोज और उसके बाद रिजल्ट बटन से परिणाम जांचा जाएगा। अंत में क्लियर बटन दबाकर वोटों की संख्या शून्य की जाएगी। इसके अलावा उपयोग में न आनेवाले सभी बटन और अंतिम एंड बटन को व्हाइट मास्किंग टैब से सील किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया पहला मॉक पोल मानी जाएगी।
