– आव्हाड और पडलकर समर्थकों के बीच जमकर मारपीट
-दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर बरसाए लात और घूंसे
– ‘रिपोर्ट आने के बाद दोषी पक्ष पर होगी कार्रवाई’, बोले विधानसभा अध्यक्ष
– एक दिन पहले विधानमंडल परिसर में दोनों नेताओं के बीच हुआ था विवाद
सामना संवाददाता / मुंबई
इस बार विधान मंडल के मानसून सत्र में कुछ नेताओं के बीच टशन इस कदर बढ़ गया कि उनके कार्यकर्ता अब आपस में मारामारी करने तक पहुंच गए हैं। कल गुरुवार को विधान भवन के प्रांगण में राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड और भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर जूतम-पैजार हुई। विधानभवन की लॉबी की सीढ़ियों पर ही दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस मे भिड़ गए। दोनों के समर्थकों के बीच जमकर लात-घूंसे और मुक्के चले। कई के तो कपड़े तक फट गए। आश्चर्य यह है कि इस मौके पर खुद पडलकर मौजूद थे। हालांकि, गेट पर तैनात सुरक्षा रक्षकों सहित तमाम लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को पकड़कर अलग किया। लॉबी की सीढ़ियों पर हुई मारपीट का मुद्दा बाद में विधानसभा में भी उठा। कई विधायकों ने इस पर चिंता व्यक्त की। विधायक रोहित पवार और सना मलिक ने आरोप लगाया कि विधानभवन में आते समय दिक्कतें हो रही हैं। बता दें एक दिन पहले विधान भवन के बाहर दोनों विधायक भिड़ गए थे। उनके बीच गाली-गलौज तक मामला पहुंच गया था। उस झगड़े को आधार मानकर कल विधान भवन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास लॉबी में विधायक गोपीचंद पडलकर के कार्यकर्ता ऋषिकेश टकले ने कुछ मामूली कहा-सुनी के दौरान विधायक जितेंद्र आव्हाड के मुख्य कार्यकर्ता नितिन देशमुख के साथ मारामारी शुरू कर दी। सदन में आशीष शेलार ने पूरी घटना की विस्तार से जानकारी दी। इस पर अध्यक्ष ने रिपोर्ट मांगी और जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। यह सब होते समय गोपीचंद पडलकर सदन से बाहर निकल गए।
‘गुंडा हो या समर्थक, उन्हें पास देने वालों पर कार्रवाई करें!’
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानभवन में मारामारी की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि दंगा करने वाले चाहे समर्थक हों या गुंडे, असल कार्रवाई उनके खिलाफ होनी चाहिए, जिन्होंने उन्हें प्रवेश पास दिया है। यह अधिकार अध्यक्ष का होता है। क्या अध्यक्ष को गुमराह किया गया? यह भी एक मुद्दा है। अगर राज्य की स्थिति इस हद तक आ गई है, तो विधान भवन का क्या मतलब रह जाता है? ऐसा सवाल उद्धव ठाकरे ने उठाया। गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को बाकी सारे विषय छोड़कर तुरंत उन गुंडों और उनके संरक्षकों पर सख्त कार्रवाई करनी ही चाहिए। तभी आप राज्य के पालक और मुख्यमंत्री के रूप में जनता के समक्ष खड़े होने के योग्य होंगे, ऐसा तीखा प्रहार उद्धव ठाकरे ने किया।
