आसमां का परचम

दिल ने कोई गीत माला गाया
संगीत ने ऐसा धुन बजाया
मन के सितार ने तरंगें गाई
बाजे ने भी अपना सुर मिलाया
मन मचल पड़ा, चेहरा खिल उठा
किसी के आने की प्यास जग उठी
वो भी वक्त रहते आया
आंखें मिलीं, होंठ कंपकंपा उठे
पैरों की झांझर ने छमछमाया
चूड़ी-कंगन शर्मा गए
जब उसने पर्दा उठाया
चांदनी ने भी लजा से अपना मुखड़ा छुपाया
झिलमिल सितारों की रोशनी से
चमक उठा सारा आलम
दो सितारे मिले, महक उठा घर-आंगन
आसमां ने भी अपना परचम लहराया।
-अन्नपूर्णा कौल, नोएडा

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