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दरभंगा से गया, रोहतास से कटिहार … गांव-गांव से खदेड़े जा रहे भाजपाई!

-जनता से ठगी अब नहीं चलेगी
-बिहारवासी पूछ रहे, `कहां है मोदी की गारंटी?’
सामना संवाददाता / पटना
बिहार में चुनाव से पहले सियासत तो गरम है ही, लेकिन इस बार जमीनी स्तर पर भी माहौल काफी गरमाता नजर आ रहा है। जिन इलाकों में सालों से जनता की परेशानियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, वहां अब बिहार की जनता सीधे नेताओं से सवाल पूछ रहे हैं। हाल ही में बिहार के कुछ जिलों से ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जहां भाजपा उम्मीदवारों को प्रचार के दौरान जनता के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा। गांव-गांव, गली-गली भाजपा नेताओं की बेइज्जती हो रही है। दरभंगा से गया, रोहतास से कटिहार तक कई नेताओं को जनता ने खदेड़ दिया है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि इस बार बिहार के लोगों ने मूड बना लिया है कि अबकी बार बिहार से एनडीए को `गेट आउट’ यानी बाहर का रास्ता दिखाना है। भाजपा नेताओं के बहिष्कार की ये सभी घटनाएं इसी बात का सबूत है।
बता दें कि बिहार के वैâमूर जिले के मोहनिया विधानसभा क्षेत्र में रविवार देर शाम बीजेपी प्रत्याशी और मौजूदा विधायक संगीता कुमारी को चुनाव प्रचार के दौरान लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा। जब संगीता मोहनपुर गांव पहुंचीं तो ग्रामीणों ने ‘विकास कहां है?’ के नारे लगाए। और देखते ही देखते माहौल गरम हो गया। हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों को संगीता कुमारी को तुरंत गाड़ी में बैठाकर वहां से निकालना पड़ा। यह कोई अकेली घटना नहीं है, जहां भाजपाइयों को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा है इससे पहले दरभंगा जिले की हायाघाट विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक रामचंद्र प्रसाद जनता के विरोध का सामना झेल चुके हैं। उन पर आरोप है कि पांच साल में उन्होंने इलाके का कोई ठोस विकास कार्य नहीं कराया। गया जिले के वजीरगंज में भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। क्षेत्र में हर गांव में उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर ग्रामीणों ने उन्हें गांव से बाहर तक छोड़ दिया।
बीते दिनों उप मुख्यमंत्री को भी झेलना पड़ा विरोध
बीते दिनों बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को भी विरोध झेलना पड़ा। लोगों का कहना है कि बड़े पद पर रहने के बावजूद क्षेत्र में जिस स्तर की उम्मीद थी, वैसा परिवर्तन नहीं आया। यह विरोध सरकार के प्रति निराशा का संकेत भी माना जा रहा है।

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