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गरीबी से क्रिकेट तक

तिलक वर्मा ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है। एशिया कप फाइनल में नाबाद ६९ रनों की शानदार पारी ने उन्हें देशभर में ‘सुपरस्टार’ बना दिया। हैदराबाद में जन्मे तिलक का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता इलेक्ट्रिशियन थे और कोचिंग का खर्च उठाना संभव नहीं था। तिलक की प्रतिभा को सलाम बयाश नाम के कोच ने पहचाना और उन्होंने तिलक की पूरी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी उठाई। तिलक रोज १० किलोमीटर पैदल चलकर कोच के पास जाते और फिर दोनों मिलकर ४० किलोमीटर दूर अकादमी जाते। २०१४ में उन्हें हैदराबाद की अंडर-१४ टीम में जगह मिली। तिलक दिन में १२ घंटे तक अभ्यास करते थे। उनकी मेहनत रंग लाई और वे अंडर-१९, डोमेस्टिक क्रिकेट और फिर आईपीएल तक पहुंचे। २०२२ में मुंबई इंडियंस ने उन्हें १.७ करोड़ में खरीदा और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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