रोहित माहेश्वरी
योगी सरकार के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बिहार की सियासत में भी दांव आजमाना शुरू कर दिया है। राजभर अब तक ५३ सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के कुछ भाजपा नेताओं ने अपने स्वार्थ के कारण सुभासपा के योगदान और कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज किया है। राजभर का यह कदम भाजपा और एनडीए के लिए सिरदर्द बन सकता है।
यूपी की राजनीति में दीया विवाद
उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों दीया विवाद में उलझी हुई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बयान के बाद बीजेपी और सपा आमने-सामने हैं। भाजपा नेताओं ने अखिलेश पर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है, जबकि सपा इसे जनभावनाओं को भटकाने की कोशिश बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव की लगातार बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा असहज है और इसी कारण वह हर बयान को राजनीतिक हथियार बना रही है। वहीं, अखिलेश यादव बयानबाजी के इस जाल में फंसे बिना मुद्दों की राजनीति पर जोर दे रहे हैं।
‘बाहुबली’ बयान
पर घमासान
योगी सरकार में मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने हाल ही में धनंजय सिंह और बृजेश सिंह जैसे बाहुबलियों को लेकर दिए बयान से हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में ताकत और समाज के प्रभावशाली चेहरों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संजय निषाद २०२७ की तैयारियों में ‘बाहुबलियों’ का सहारा लेकर अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
