कम ही मिलते हैं यहां लोग हंसाने के लिए
जिसको देखो वो है तैयार रुलाने के लिए
तीरगी मुझको परेशान किया करती है
अब दिया चाहिए जुल्मत को मिटाने के लिए
है घराने ने किया आप की खातिर कितना
आप भी कीजिए कुछ अपने घराने के लिए
मेरे महबूब तेरी छांव में रौशन है जहां
तेरी उल्फत ही तो काफी है दिवाने के लिए
थी कनक ये ही तमन्ना तू रहे पास मेरे
और कुछ है नहीं अब पास गंवाने के लिए
-डॉ. कनक लता तिवारी
