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बच्चों को नशीले पदार्थों और मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए केरल के पत्तनमतिट्टा जिले के नेदुंबपुरम ग्राम पंचायत द्वारा एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसका नाम है कुट्टीकेयर। इसके तहत गांव के ८वीं से १२वीं कक्षा के छात्र, बीमार और बुजुर्गों से मिलते हैं, उनके हालचाल जानते हैं और उन्हें हिम्मत बंधाते हैं कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे। सच तो यह है कि दूसरों के सुख के लिए शुरू की गई पहल युवाओं को खुद के हेल्थ के प्रति जागरूक बनाने में भी मदद करती है।
उद्देश्य: बच्चों को नशीले पदार्थों और मोबाइल फोन की लत से बचाना।
तरीका: छात्रों को गांव के बीमार और बुजुर्गों से मिलने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित करना।
लाभ: युवाओं में सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। बड़ों के प्रति सम्मान और सहानुभूति की भावना पैदा होती है। ०बच्चे गांव के अलग-अलग वार्डों में उन घरों तक गए, जहां बुजुर्ग या बीमार लोग थे। इन बच्चों ने गांव के ११३ ऐसे मरीजों के साथ वक्त बिताया, जो बीमारी की वजह से अपने घरों में बिस्तर पर पड़े थे। अब यह सिलसिला नियमित हो गया है। १६ बच्चों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
गांव वाले मानते हैं कि इससे बच्चे ज्यादा संवेदनशील और वे बुजुर्ग-बीमारों की देखभाल के प्रति जागरूक बनते हैं। इसी साल ४ अप्रैल से शुरू हुई इस मुहिम में शामिल बच्चे नियमित रूप से बीमार और बुजुर्गों से मिल रहे हैं। इससे वे स्वास्थ्य के प्रति भी ज्यादा जागरूक हो गए हैं। नेदुंबपुरम ग्राम पंचायत के उपाध्यक्ष शैलेश के मुताबिक, एनसीसी, रेड क्रॉस जैसे कार्यक्रमों का हिस्सा बननेवाले छात्रों को जिस तरह ग्रेस मार्क मिलता है, ठीक उसी तरह इस मुहिम से जुड़े छात्रों को भी ग्रेस मार्क्स मिलेंगे।
डायरी नोट्स
कुट्टीकेयर प्रोजेक्ट के प्रमुख और आयुर्वेदिक अस्पताल के डॉक्टर अबिनेश गोपन का कहना है कि बच्चे पहले गांव में मरीजों का सर्वे करते हैं। इससे उनको गांव की प्राथमिक समझ हो जाती है। इसके बाद वे डेटा का विश्लेषण करते हैं। फिर वे महीने में एक बार कम से कम एक मरीज से मिलने जरूर जाते हैं। उन्हें एक डायरी दी गई है, जिसमें सारी सूचनाएं, अपनी भावनाएं और समझ लिखनी होती है। यह डायरी हर महीने चेक की जाती है, जिसकी सेवा सबसे अच्छी होती है, उसे इनाम भी मिलता है।
डॉ. गोपन का मानना है कि कुट्टीकेयर के चलते बच्चे दयालु और सामाजिक बन जाते हैं, जो इस संस्था का उद्देश्य है। जब वे बिस्तर पर पड़े किसी बीमार इंसान से बातचीत करते हैं तो उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आते हैं और इस वजह से उनमें मदद करने की भावना बढ़ती है। इसके अलावा बच्चों के लिए गांव में और भी कई तरीके के प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं
बालसभा: गांव के हर वार्ड में हर महीने २८ तारीख से पहले बच्चों की बैठक होती है। यहां बच्चे गाने, डांस, मिमिक्री जैसे कार्यक्रम करते हैं। साल में एक बार गांव के स्तर पर बच्चों के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
विजनना वड़ी : बच्चों की लाइब्रेरी है। यहां किताबें लाकर बच्चे पढ़ सकते हैं। वे किताबें ले भी जा सकते हैं। कोई सदस्यता शुल्क नहीं है।
मोटीवेशन क्लास: गांव में मोटिवेशनल क्लास होती है। इसमें बच्चों को देश के कानून, रोड सेफ्टी, जीवन के लक्ष्यों के बारे में बताते हैं।
