धीरेंद्र उपाध्याय
-‘मीठा जहर’ पर बेस्ट सर्जिकल स्ट्राइक
वर्ल्ड डायबिटीज डे के मौके पर मुंबई की बेस्ट उपक्रम ने एक अनोखी पहल की पॉजिटिव रिपोर्ट पेश की है। बेस्ट के चिकित्सा विभाग ने ‘डायबिटीज रिवर्सल प्रोग्राम’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करना है।
महाराष्ट्र में पांच सालों से शुरू ‘डायबिटीज रिवर्सल प्रोग्राम’ अब बेस्ट उपक्रम की सबसे बड़ी स्वास्थ्य क्रांति बन चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया है कि मधुमेह पर विजय केवल दवाओं से नहीं, बल्कि अनुशासित जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से संभव है। बेस्ट के चिकित्सा विभाग की इस पहल के तहत अब तक १,६८१ कर्मचारियों ने सेहतमंद जीवन का नया फॉर्मूला अपनाया है, जिनमें से ३५३ कर्मियों ने पूरी तरह डायबिटीज की दवा छोड़ दी है। परिणाम चौंकाने वाले हैं कि दवा पर होने वाला खर्च ३० लाख रुपए से घटकर मात्र ५ लाख रुपए रह गया है। यह सफलता केवल एक स्वास्थ्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि ‘मीठा जहर’ से मुक्ति पाने के लिए असंतुलित खानपान और जीवनशैली में सुधार लाना ही असली इलाज है।
उल्लेखनीय है कि हिंदुस्थान में डायबिटीज अब ‘साइलेंट एपिडेमिक’ बन चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, देश की कुल आबादी का लगभग १० प्रतिशत हिस्सा यानी करीब १४ करोड़ हिंदुस्थानी इस ‘मीठे जहर’ के शिकार हैं। चिंताजनक बात यह है कि यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और अनुमान है कि साल २०३० तक यह दोगुना हो सकता है। इसके अलावा हर दिन देश में ९५७ लोगों की मौत डायबिटीज से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। इस तरह हर तीन मिनट में दो लोग अपनी जान गवां रहे हैं। इस बढ़ते खतरे के पीछे मुख्य कारण अनियमित खान-पान, बिगड़ी जीवनशैली, मोटापा, व्यायाम की कमी, शराब और तंबाकू का सेवन हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोगों ने आज से ही जीवनशैली में सुधार नहीं किया, तो आने वाले दशक में डायबिटीज देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन जाएगी। हालांकि, इसी अंधकार में मुंबई की बेस्ट उपक्रम के चिकित्सा विभाग ने एक अनोखी रोशनी दिखाई है। पांच साल पहले बेस्ट में शुरू हुआ ‘डायबिटीज रिवर्सल प्रोग्राम’ अब एक राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है। कागजी योजनाओं और भाषणों से आगे बढ़कर बेस्ट ने डायबिटीज की जड़ पर प्रहार किया। साथ ही यह साबित कर दिया है कि दवा नहीं, जीवनशैली ही इसका असली इलाज है।
‘डबल पॉइजनिंग’
बेस्ट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंघल ने कहा कि १४ नवंबर को देशभर में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इस दिन मेडिकल जगत में वर्ल्ड डायबिटीज डे है, जो अहम दिन है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज के मरीजों के लिए मीठा खाना जहर के समान है, फिर भी लोग मिठाई खाते हैं और शुगर कम करने के लिए गोलियां लेते हैं। एक तरफ मीठा, दूसरी तरफ दवा यह एक ‘डबल पॉइजनिंग’ है। लोग दवाओं के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार इलाज बीमारी से ज्यादा नुकसानदेह साबित होता है।
७ से १० वर्ष कम हो जाती है मरीजों की आयु
डॉ. अनिल कुमार सिंघल ने कहा कि आज हार्ट अटैक, पैरालिसिस, अंधापन, किडनी फेल्योर, वैंâसर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों के बढ़ने का सबसे बड़ा कॉमन पैâक्टर डायबिटीज है। इससे जुड़ी बीमारियों के कारण न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि मरीजों की आयु भी औसतन ७ से १० वर्ष कम हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ‘डायबिटीज रिवर्सल प्रोग्राम’ एक सिस्टमैटिक अप्रोच है, जिसमें मरीजों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए शिक्षित किया जाता है। डॉ. सिंघल का कहना है कि कंसिस्टेंसी और फॉलोअप ही सफलता की कुंजी है।
तीन सालों से दवाइयां हैं बंद डॉ. सिंघल ने कहा कि इस प्रोग्राम के तहत बेस्ट के ३५३ में से आज हमारे कई कर्मचारी ऐसे हैं, जो ५ से २० साल से डायबिटीज के मरीज थे, लेकिन वे अब बिना किसी दवा के पूरी तरह स्वस्थ हैं। इनमें से कई की २.५-३ सालों से दवाइयां बंद हैं। इसके अलावा ५०० कर्मचारियों की दवाइयों की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही डायबिटीज से जुड़ी बीमारियों जैसे हृदय रोग और टीबी रोग और मृत्यु दर में भी भारी कमी दर्ज की गई है
‘लाइफ सेंटेंस’ नहीं, बल्कि ‘लाइफस्टाइल’ का है परिणाम
डॉ. सिंघल ने यह भी बताया कि चीनी, शहद, खजूर, गेहूं, मैदा, केला, चीकू, सीताफल, आम और खरबूजा जैसी जो चीजें कम खानी चाहिए, वही लोग रोज खा रहे हैं। इसके अलावा सब्जियां, फाइबर, प्रोटीन जैसी जो चीजें ज्यादा खानी चाहिए, उनकी मात्रा कम हो गई है। यही असंतुलन बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। इस हेल्थ इनिशिएटिव ने यह साबित कर दिया है कि डायबिटीज ‘लाइफ सेंटेंस’ नहीं, बल्कि ‘लाइफस्टाइल’ का परिणाम है और सही जीवनशैली से इसे रिवर्स किया जा सकता है।
