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कैग के झटके से सकते में सरकार…लाडली बहन योजना में भ्रष्टाचार पक्का है!

-अब ‘लाडले’ भाइयों से वसूली जाएगी रकम

-मंत्री आदिती तटकरे का वही पुराना राग

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वैâग (सीएजी) द्वारा योजना में लगभग ३,५०० करोड़ रुपए की कथित अनियमितताओं पर आपत्ति जताए जाने के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने भी स्वीकार किया है कि योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ियां हुई हैं। योजना का गलत तरीके से लाभ लेने वाले पुरुषों से सरकारी राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि, वसूली कब और वैâसे होगी, इस पर मंत्री ने कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई।
योजना में सामने आई गड़बड़ियों ने सरकार के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग १५ हजार पुरुषों ने इस योजना का लाभ लिया। इतना ही नहीं, करीब १६ लाख ऐसे लाभार्थी पाए गए, जिनके परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा २.५ लाख रुपए से अधिक थी। इसके अलावा ४.४२ लाख ऐसे लाभार्थी मिले, जिनके परिवार में सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद योजना का लाभ लिया गया। वहीं ३.६ लाख महिलाएं संजय गांधी निराधार योजना का लाभ लेने के साथ-साथ लाडली बहन योजना की राशि भी प्राप्त कर रही थीं, जबकि २.५ लाख मामलों में एक ही परिवार के दो से अधिक सदस्यों ने योजना का लाभ लिया। इन सभी लाभार्थियों को अपात्र घोषित किया गया है। ऐसे में अब सवाल केवल पुरुषों से राशि की वसूली का नहीं, बल्कि सभी अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई का भी उठ रहा है। आदिती तटकरे ने कहा कि योजना का लाभ लेनेवाले पुरुषों से राशि वसूलने के लिए विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। वहीं ९२ लाख लाभार्थियों का पुन: सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि अपात्र पुरुष लाभार्थियों से पूरी राशि वापस ली जाएगी। अब इस दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, वहीं सरकारी कर्मचारियों से वसूली की प्रक्रिया पहले से जारी है और उनसे प्राप्त राशि सरकारी कोष में जमा कराई जा रही है।
जिम्मेदार कौन? विपक्ष का सवाल
विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि जिस योजना को विधानसभा चुनाव में सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया गया था, उसी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। अब वैâग की आपत्तियों और अपात्र लाभार्थियों से वसूली की कार्रवाई ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर अपात्र लोग योजना का लाभ ले रहे थे तो सत्यापन व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

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