मुख्यपृष्ठटॉप समाचारलखनऊ में १५ मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम...मुंबई की एसी...

लखनऊ में १५ मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम…मुंबई की एसी लोकल बनी गैस चैंबर!

-पीक आवर में एसी और आपात संपर्क प्रणाली ने दिया धोखा; १५ मिनट तक डिब्बों में फंसी रहीं जिंदगियां, एक यात्री अस्पताल में भर्ती

– मुलुंड स्टेशन पर खड़ी टिटवाला–सीएसएमटी एसी लोकल का वातानुकूलन बंद

-यात्रियों को सांस लेने में परेशानी, कुछ यात्री बेहोश; फहीम अंसारी अस्पताल में भर्ती

-रेल प्रशासन ने ट्रेन रद्द की, लेकिन आपात वेंटिलेशन और बैकअप व्यवस्था पर गंभीर सवाल

फिरोज खान / मुंबई

सोमवार सुबह पीक आवर में मुंबई की एसी लोकल ट्रेन यात्रियों के लिए आरामदायक सफर के बजाय दमघोंटू डिब्बा बन गई। टिटवाला से सीएसएमटी जा रही सुबह ८:३३ बजे की एसी लोकल करीब ९:२६ बजे मुलुंड स्टेशन पहुंची तो तकनीकी खराबी के कारण उसका एयर कंडीशनिंग सिस्टम बंद हो गया। खचाखच भरे बंद डिब्बों में कुछ ही मिनटों में गर्मी और घुटन इतनी बढ़ गई कि यात्रियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ यात्री अचेत हो गए और एक यात्री को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन करीब १५ मिनट तक प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही। यात्रियों ने आपात संपर्क प्रणाली के जरिए गार्ड से सहायता मांगने का प्रयास किया, लेकिन उनका आरोप है कि समय पर संपर्क नहीं हो सका। दरवाजे तुरंत नहीं खुलने से डिब्बों के अंदर अफरा-तफरी मच गई। महिला डिब्बे में मौजूद छोटे बच्चे रोने लगे, जबकि कई यात्रियों को चक्कर और बेचैनी महसूस होने लगी।
दरवाजे खुले तो बाहर निकाले गए बेहोश यात्री
दरवाजे खुलने के बाद सहयात्रियों ने अचेत यात्रियों को बाहर निकालकर प्लेटफॉर्म की बेंच पर लिटाया और उन्हें होश में लाने की कोशिश की। फहीम अंसारी नामक यात्री की हालत अधिक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। मध्य रेलवे ने खराब एसी लोकल को सेवा से हटाकर रद्द कर दिया। इससे मुलुंड, कुर्ला और आगे के स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। रेलवे का कहना है कि तकनीकी खराबी की जांच की जा रही है। बाद में प्रभावित ट्रेन को मुलुंड से कुर्ला के बीच दरवाजे खुले रखकर चलाए जाने की जानकारी भी सामने आई, ताकि डिब्बों में हवा का प्रवाह बना रहे। यह अस्थायी उपाय स्वयं बताता है कि बंद एसी डिब्बों में मुख्य प्रणाली ठप पड़ने पर स्वतंत्र आपात वेंटिलेशन कितना आवश्यक है।
-एसी बंद, दरवाजे बंद और मदद की लाइन भी बंद
-मुंबई लोकल में खतरे की घंटी!
मुंबई की यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि हाल ही में लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग में १५ लोगों, जिनमें अधिकांश छात्र थे, की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में एसी कंप्रेसर फटने की आशंका जताई गई, लेकिन हादसे को भयावह बनाने में बंद रास्ते, अपर्याप्त आपात निकास और सुरक्षा नियमों की अनदेखी जैसी खामियों की भी भूमिका बताई गई। हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने संबंधित इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की।
इसके बाद बैंकॉक के एक पब में आग लगने से २७ लोगों की मौत की घटना भी सामने आई। दोनों घटनाएं चेतावनी देती हैं कि बंद और वातानुकूलित परिसरों में एसी, बिजली, वेंटिलेशन तथा आपात निकास की छोटी-सी खराबी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। मुलुंड स्टेशन पर एसी लोकल का वातानुकूलन बंद होना, दरवाजों का समय पर न खुलना और आपात संपर्क व्यवस्था के कथित रूप से काम न करने के आरोप सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सौभाग्य से ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी। यदि यही स्थिति दो स्टेशनों के बीच उत्पन्न होती, तो यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कहीं अधिक कठिन हो सकता था।
महंगा टिकट, मगर सुरक्षा का बैकअप कहां?
एसी लोकल के यात्रियों से सामान्य लोकल की तुलना में अधिक किराया लिया जाता है। ऐसे में केवल वातानुकूलित सुविधा ही नहीं, बल्कि विश्वसनीय सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना भी रेलवे की जिम्मेदारी है। प्रत्येक डिब्बे में स्वतंत्र आपात वेंटिलेशन, मैनुअल दरवाजा खोलने की सुरक्षित व्यवस्था, कार्यशील संवाद प्रणाली और नियमित सुरक्षा परीक्षण अनिवार्य होने चाहिए। मुंबई की यह घटना रेलवे के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अगली बार ऐसी तकनीकी खराबी किसी स्टेशन पर ही हो, यह जरूरी नहीं।
स्टेशन पर रुकी थी, इसलिए टला बड़ा हादसा
सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि यदि यही खराबी दो स्टेशनों के बीच हुई होती तो क्या स्थिति बनती? बंद दरवाजों, अत्यधिक भीड़ और निष्क्रिय वातानुकूलन के बीच सहायता पहुंचने में थोड़ी-सी देरी भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती थी। मुलुंड स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने के कारण यात्रियों को समय रहते बाहर निकाला जा सका और बड़ा हादसा टल गया।

अन्य समाचार