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शहर की कहानी, मुंबईकरों की जुबानी…मौत का कुआं बने खुले मैनहोल!..२ हजार से ज्यादा मैनहोल अभी भी असुरक्षित

द्रुप्ति झा / मुंबई

हाल ही में साकीनाका में खुले मैनहोल में एक व्यक्ति के गिरने से हुई मौत की घटना ने साबित कर दिया है कि मनपा को मुंबईकरों की जान की कोई परवाह नहीं है। हालांकि, लोगों को गुमराह करने के लिए मनपा ने एक लोहे का मैनहोल रेलगार्ड तैयार किया है, जिसके नाम पर फिर एक बार नए टेंडर का खेल शुरू होगा, ताकि अपने चहेतों की जेबें भरी जा सकें। मनपा के इस दिखावेपन से लोगों को कोई मतलब नहीं है, उन्हें सिर्फ सुरक्षित, गड्ढा-मुक्त और मौत के कुओं से मुक्त सड़कें चाहिए। मुंबई की सड़कों पर खुले मौत के कुएं मासूम मुंबईकरों को निगल रहे हैं।
भगवान भरोसे जनता
मुंबईकरों के लिए ये चिंता का विषय है कि साकीनाका जैसी घटना मनपा की लापरवाही की वजह से मुंबई के किसी भी कोने में दोबारा हो सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, इस घटना के बाद भी मुंबई में २,००० से ज्यादा मैनहोल जानलेवा बने हुए हैं। इन खुले मैनहोलों को ढंकने में मनपा पूरी तरह नाकाम है। हर साल ड्रेनेज और मानसून सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए डकारने वाली मनपा आज भी नागरिकों को सुरक्षित सड़कें देने में असमर्थ है।
चोरों को खुला न्योता
दादर में रहने वाली हिना खातून ने कहा, ‘जहां लोहे के ढक्कन तक चोरी हो जाते हैं, वहां सड़कों पर लावारिस छोड़े गए ये महंगे और भारी रेलगार्ड कितने दिन टिकेंगे, यह योजना सिर्फ चोरों की चांदी काटने और हमें गुमराह करने के लिए लाई जा रही है। यहां लोगों की जान जा रही है और मनपा अभी भी एक्सपेरिमेंट कर रही है।
२२५ किलो का रेलगार्ड
भारी आक्रोश के बीच, सोमवार को मुंबई की मेयर ऋतु तावडे और अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने मैनहोल रेलगार्ड के एक लोहे के ढांचे का बड़े तामझाम के साथ निरीक्षण किया। दावा किया जा रहा है कि एल-वार्ड (कुर्ला) में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। लेकिन ग्राउंड जीरो की हकीकत जानने वाले मुंबईकर इसे मनपा का एक और नया घोटाला मान रहे हैं। इस रेलगार्ड का वजन २२५ किलो है।

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