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हनीफनामा : मौसमी की बेजा ‘कोशिश’ और…!

हनीफ जवेरी

जीवन में कई बार हम बिना सोचे-समझे ऐसे पैâसले लेते हैं, जो उस समय तो सही लगते हैं, परंतु बाद में वही हमारे पछतावे की वजह बन जाते हैं और तब जाकर कहीं यह अहसास होता है कि गलती हमारी ही थी, न की वक्त और हालात की। ऐसी ही एक गलती अभिनेत्री मौसमी चटर्जी से तब हुई जब वो हिंदी फिल्म जगत में बिल्कुल नई थीं और उस गलती का पछतावा उन्हें आज भी है।
हुआ यूं कि छोटी उम्र में उनकी फिल्मों में एंट्री हुई, जिस कारण वो यह समझ नहीं पाईं कि उन्हें अपने करियर में कहां फोकस करना है या किस प्रोजेक्ट को महत्व देना है? अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘अनुराग’ में उन्होंने एक अंधी लड़की का बेहतरीन किरदार निभाया था। लिहाजा, निर्देशक ग़ुलजार को लगा कि वो गूंगी लड़की का किरदार भी बखूबी निभा लेंगी और उन्होंने मौसमी को अपनी फिल्म ‘कोशिश’ के लिए साइन कर लिया। जाने-माने निर्माता एन.सी. सिप्पी की फिल्म ‘गुड्डी’ हिट हो गई थी और अब वो संजीव कुमार को लेकर फिल्म ‘कोशिश’ बना रहे थे। फिल्म ‘खिलौना’ के बाद संजीव कुमार की मार्वेâट वैल्यू बढ़ गई थी, लेकिन मौसमी के मुकाबले वो अपने करियर को लेकर अधिक सतर्क थे। लिहाजा, उन्होंने अपनी फीस में समझौता करके फिल्म ‘कोशिश’ साइन कर ली। फिल्म ‘कोशिश’ को केवल चार महीने में कम बजट के साथ पूरा करने की योजना बनाई गई। चार महीने में फिल्म पूरा करने के उद्देश्य से ‘मोहन’ स्टूडियो में एक सेट लगाया गया। यूनिट को यह सूचित किया गया कि फिल्म की शूटिंग की शिफ्ट सुबह ११ बजे से शाम ६ बजे तक नहीं, बल्कि ८ बजे तक चलेगी। सभी लोग सहयोग देने को तैयार भी थे, लेकिन पहले ही दिन की शूटिंग पर शाम ६ बजते ही मौसमी चटर्जी ने गुलजार से घर जाने की इजाजत मांगी। गुलजार ने यह सोचकर अनुमति दे दी कि यह सिर्फ एक दिन की बात है, परंतु इसके बाद मौसमी हर दिन ६ बजे घर जाने की अनुमति मांगने लगीं। लगातार चार दिनों तक चले इस सिलसिले से गुलजार को यह आभास हो गया कि इस तरह तो वे इस फिल्म को चार महीने में पूरी नहीं कर पाएंगे। लिहाजा, वे तुरंत मौसमी की शिकायत लेकर अपने सहायक व निर्माता के बेटे राज सिप्पी के साथ एन.सी. सिप्पी के दफ्तर पहुंचे।
मेरे एक साक्षात्कार के दौरान राज सिप्पी ने मुझे बताया कि उनके पिता सिप्पी साहब ने तत्काल जया भादुड़ी को फोन किया और सिर्फ इतना कहा, ‘क्या तुम मेरी अगली फिल्म में काम करना पसंद करोगी?’ खैर, अगले ही दिन जया भादुड़ी बिना स्क्रिप्ट सुने या कोई अनुबंध साइन किए फिल्म ‘कोशिश’ के सेट पर मौजूद थीं। इस तरह मौसमी चटर्जी के हाथों से एक बेहतरीन फिल्म निकल गई।
जया ने काम शुरू ही किया था कि ‘मोहन’ स्टूडियो प्रबंधन और प्रोड्यूसर के बीच अनबन हो गई। दरअसल, ‘कोशिश’ का सेट गलती से तय समय से पहले ही किसी और निर्माता की फिल्म के लिए बुक हो गया था। अब सिप्पी के पास इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं था और वह बेवजह परेशानी में आ गए। लंबे तर्क-वितर्क के बाद सिप्पी को अपनी फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी और पूरा सेट ‘मोहन’ स्टूडियो से ‘नटराज’ स्टूडियो शिफ्ट करना पड़ा। इसके बाद ही फिल्म ‘कोशिश’ संजीव कुमार और जया भादुड़ी के साथ पूरी की गई। याद रहे, संजीव कुमार और गुलजार का साथ यहीं से शुरू हुआ था। इतिहास हमेशा दोहराता है, जिस तरह फिल्म ‘कोशिश’ के लिए जया भादुड़ी को मौसमी की जगह लिया गया था, ठीक वैसे ही बरसों बाद गुलजार की ही फिल्म ‘अंगूर’ में मौसमी को जया भादुड़ी की जगह लिया गया। हुआ बस इतना कि जया अपनी निजी जिंदगी में किसी कारणवश अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रही थीं। लिहाजा, गुलजार ने आपसी समझदारी से उनकी जगह मौसमी को लेकर फिल्म ‘अंगूर’ पूरी की, जो बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही।

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