तकलीफों से लड़ना होगा।
सोच-समझकर चलना होगा।।
अगल-बगल के मौसम को भी,
धीरे-धीरे पढ़ना होगा।।
डर के आगे राह बनाकर,
रोज हिमालय चढ़ना होगा।।
संयम को हथियार बनाकर,
साहस के संग चलना होगा।।
देखो कैसी हवा बह रही,
सुबह-शाम कुछ पढ़ना होगा।।
इस पड़ाव से उस पड़ाव तक,
धीरजपूर्वक बढ़ना होगा।।
मुश्किल को मच्छर मत समझो,
उसको शेर समझना होगा।।
कदम-कदम पर मुश्किल से ही,
लड़ते-लड़ते बढ़ना होगा।।
जब भी हो ठहराव जरूरी,
चुप होकर कुछ कहना होगा।।
अपनी मंजिल, अपना सपना
लेकर आगे बढ़ना होगा।।
अक्ल और अनुभव के बल पर,
खुद जीवन को गढ़ना होगा।।
रोज संतुलित जीवन की कर,
संघर्षों में चलना होगा।।
तकलीफों से लड़ना होगा।
सोच-समझकर चलना होगा।।
अन्वेषी
