सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंसर की जांच के लिए आठ कैंसर डायग्नोस्टिक वैन बाजार भाव से दो से तीन गुना अधिक कीमत पर खरीदी गई हैं। बताया गया है कि जिस वैन की कीमत लगभग ४५ से ५० लाख रुपए होनी चाहिए थी, उन्हें ९९ लाख रुपए में खरीदा गया। इस तरह खरीदी गई कुल आठ वैन में करीब ३.९२ करोड़ रुपए की घपलेबाजी हुई है। इस तरह का जोरदार आरोप शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता भास्कर जाधव ने कल विधानसभा में लगाया। इस आरोप के बाद विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर ने निर्देश दिए कि अधिवेशन समाप्त होने से पहले इस मामले की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
विधानसभा में तारांकित प्रश्न उठाते हुए भास्कर जाधव ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर का पता लगाने के लिए आठ वैन खरीदीं। एक वैन की वास्तविक कीमत उसमें लगे फेब्रिकेशन और उपकरण सहित लगभग ४५ से ५० लाख रुपए होनी चाहिए थी। लेकिन आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ मिलीभगत कर सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए वैन की खरीद की गई। इस पर कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि एक वैन की कीमत ४० लाख रुपए से अधिक हो ही नहीं सकती। इन वैन में जो मशीनें लगी हैं, वे १२ लाख रुपए से अधिक की नहीं हैं फिर भी वैन महंगी कीमत पर खरीदी गई हैं। इतना ही नहीं, कई वैन में लगी मशीनें बंद पड़ी हैं। यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है। जब जांच चल रही है तो अभी तक रिपोर्ट क्यों नहीं आई?
जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश
राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर ने जवाब में कहा कि जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को इस मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। हालांकि, उनके उत्तर से विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। इसलिए आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिए कि चूंकि इस मामले में जनप्रतिनिधियों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं इसलिए जांच समिति अधिवेशन समाप्त होने से पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
