मुख्यपृष्ठस्तंभपहाड़ी पचड़े : रसगुल्ले में मरे हुए रंगड़, कलाकंद में फंगस!

पहाड़ी पचड़े : रसगुल्ले में मरे हुए रंगड़, कलाकंद में फंगस!

-एस. एस. शुक्ला

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मिठाइयों की जांच करने पहुंची खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को ऐसा नजारा मिला कि मिठास का स्वाद ही बिगड़ गया। जांच के दौरान रसगुल्ले और चमचम में मरे हुए रंगड़ यानी ततैया जैसे कीट मिले, जबकि कलाकंद में फंगस पाई गई। विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब ६५ किलो मिठाई नष्ट करवाई और जांच के लिए १९ नमूने एकत्र किए। त्योहारों के मौसम में मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर यह घटना गंभीर सवाल खड़े करती है। दुकानदार मिठाई बेच रहे थे, लेकिन डिब्बे में मिठास के साथ ऐसा अनचाहा सरप्राइज भी मिल रहा था, जिसकी कल्पना ग्राहक ने सपने में भी नहीं की होगी!
डिजिटल पढ़ाई को लगा झटका!
हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की डिजिटल प्रशिक्षण व्यवस्था की रैंकिंग ने अजीब उलटफेर दिखाया है। आईगॉट कर्मयोगी मंच से जुड़े डिजिटल लर्निंग प्रदर्शन में जुलाई के दौरान हिमाचल पहले स्थान पर था, लेकिन सितंबर की रैंकिंग में सातवें स्थान पर पहुंच गया। इसी दौरान हरियाणा और पंजाब ने बेहतर प्रदर्शन कर बढ़त बनाई। सरकारी कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देने वाली इस व्यवस्था का उद्देश्य उनकी प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है। अब सवाल उठ रहा है कि दो महीने में हिमाचल की रैंकिंग इतनी नीचे कैसे आ गई। डिजिटल पढ़ाई में अधिकारी पहले नंबर पर पहुंचे तो उपलब्धि का ढोल बजा, मगर सितंबर आते-आते छह पायदान नीचे उतर गए। पहाड़ चढ़ने वाले प्रदेश की डिजिटल रैंकिंग ने फिलहाल उतराई पकड़ ली है!
शिमला से मनाली अब हेलिकॉप्टर से, किराया ६,२७१ रुपए
हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों के लिए शिमला और मनाली के बीच हेलि टैक्सी सेवा शुरू करने की तैयारी है। दिवाली से प्रस्तावित इस सेवा का एकतरफा किराया ६,२७१ रुपए बताया गया है। इसका उद्देश्य दोनों प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच यात्रा को सुविधाजनक बनाना और सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करना है। पहाड़ी सड़कों पर मोड़ों और यातायात के बीच लंबी यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए यह नया विकल्प होगा। हालांकि, उड़ान का संचालन मौसम, तकनीकी तैयारियों और संबंधित अनुमति पर निर्भर करेगा। पहाड़ों में सड़क से सफर करते समय यात्रियों को अक्सर मोड़ गिनने पड़ते हैं। अब जेब अनुमति दे तो मोड़ों के बजाय बादलों को गिनते हुए मनाली पहुंचने का विकल्प मिलने वाला है!
११ हजार फीट की ऊंचाई पर पहली बार पहुंची गाड़ी!
उत्तराखंड में चीन सीमा से सटे लगभग ११ हजार फीट की ऊंचाई वाले एक गांव तक पहली बार मोटर वाहन पहुंचने की खबर सामने आई है। दुर्गम पहाड़ी इलाके में सड़क संपर्क स्थापित होना स्थानीय निवासियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। सड़क संपर्क से आवश्यक सामग्री पहुंचाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। हालांकि, नियमित यातायात और सड़क की सभी मौसमों में उपयोगिता का वास्तविक परीक्षण अभी बाकी है। मैदानों में गाड़ी दरवाजे तक पहुंचना सामान्य बात है, लेकिन पहाड़ के इस गांव में पहली मोटर गाड़ी का पहुंचना ही बड़ी खबर बन गया!
स्कूल में पहुंचे सीडीओ, छात्राओं की थाली ने खोल दी पोल!
उत्तराखंड के हल्द्वानी में पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में मुख्य विकास अधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान छात्राओं को परोसे जा रहे चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठे। निरीक्षण में भोजन की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। विद्यालयों में भोजन व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक और सुरक्षित आहार उपलब्ध कराना है, इसलिए गुणवत्ता की कमी प्रशासनिक जवाबदेही का विषय है। स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और परीक्षा परिणाम पर तो नियमित नजर रखी जाती है, लेकिन इस बार अधिकारी की नजर सीधे थाली में पहुंच गई। छात्राओं को क्या पढ़ाया जा रहा है, उससे पहले सवाल खड़ा हो गया कि उन्हें खाने के लिए आखिर क्या परोसा जा रहा है।

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