– ध्वस्तीकरण में लापरवाही
द्रुप्ति झा / मुंबई
एलफिंस्टन ब्रिज के ध्वस्तीकरण में अधिकारियों की लापरवाही की वजह से स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे लोगों में असंतोष है। इस ब्रिज के टूटने से पहले भी लोगों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई थी और अब तोड़े जाने के बाद भी मुसीबत बन हुई है। ब्रिज को तोड़ने का काम अपने अंतिम चरण में है और दूसरी तरफ नींव का काम भी चल रहा है और निवासियों ने शिकायत की है कि इससे आस-पास की इमारतों में कंपन होना शुरू हो गया है। पुल के दोनों ओर सैकड़ों साल पुरानी इमारतें हैं। पुल के निर्माण कार्य के दौरान ये इमारतें हिल रही हैं। इसलिए, निवासियों ने इन इमारतों के पुनर्विकास की मांग को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया है। साथ ही ब्रिज तोड़ते समय सड़कों पर आने-जाने वाले यात्रियों का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है क्योंकि सड़क पर किसी भी तरह की सुरक्षा का इंतजाम नहीं है।
अभी तक नहीं मिला कोई समाधान
लोगों के लिए अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। निवासी सईद कुमटे ने बताया कि अब जब इस पुल की नींव रखी जा रही है, तो इस्तेमाल हो रही मशीनों के कारण इमारतें हिल रही हैं। जिमी चैंबर में २४ परिवार और समर्थ निवास में ५२ परिवार रहते हैं। ये इमारतें हिल रही हैं। प्रभावित इमारतों के निवासियों ने एमएमआरडीए के ध्यान में यह समस्या लाने के लिए शिकायत भी की, लेकिन उसके बावजूद लोगों को कोई राहत नहीं मिली।
बता दें कि एलफिंस्टन ब्रिज की जगह पर एक डबल डेकर पुल बनाया जाएगा और इसकी आधारशिला रखी जा रही है। पूर्व-पश्चिम यातायात के लिए रेलवे स्टेशन पर एक पुल बनाया जाएगा। इसके ऊपर एक और पुल बनाया जाएगा जो वर्ली-शिवड़ी लिंक रोड का हिस्सा होगा। वर्ली-शिवड़ी लिंक रोड अटल ब्रिज और बांद्रा-वर्ली सी ब्रिज को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है।
