– डोंगरी की पहाड़ियों को भी किया जा रहा मटियामेट
सुरेश गोलानी / मुंबई
पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक संस्थाएं एवं स्थानीय नागरिकों के तीव्र विरोध के बावजूद भ्रष्ट महायुति सरकार ने मेट्रो-९ कारशेड निर्माण के लिए न सिर्फ १२,४०० पेड़ों बल्कि डोंगरी की पहाड़ियों की बलि देने की ठान ली है। यह प्रकृति का विनाश सिर्फ इसलिए किया जा रहा है, ताकि सत्तारुढ़ पार्टियों के स्थानीय नेताओं से जुड़े बिल्डरों की जमीन बचाकर उन्हें फायदा पहुंचाया जा सके।
दरअसल, भायंदर-पश्चिम स्थित सुभाषचंद्र बोस मैदान मेट्रो- ९ का अंतिम स्टेशन है, जिसके आस-पास मीरा इस्टेट (डीबी रियल्टी), राधा स्वामी सत्संग और अन्य डेवलपर्स की काफी खाली जमीनें होने के बावजूद एमएमआरडीए ने कारशेड को पहले राई गांव के पास और बाद में शहर से दूर डोंगरी (उत्तन) के पहाड़ी इलाकों में प्रस्तावित कर दिया। आरोप है कि शुरुआत में मेट्रो कारशेड का आरक्षण राई-मुर्धा-मोरवा गांवों के पीछे स्थित खाली भूखंडों पर किया गया था, जिसका एमएमआरडीए के नक्शे में स्पष्ट रूप से उल्लेख था जिसे संदेहपूर्ण हालातों में बदल दिया गया। जाहिर है कि कारशेड की ओर जाने वाली सड़क को एमएमआरडीए के नक्शे में दिखाए गए गांवों के पीछे से सीधे ले जाया जा सकता था, लेकिन चूंकि बड़ी संख्या में बड़े बिल्डरों ने उक्त तीन गांवों के पीछे हजारों एकड़ खाली जमीनें खरीदी हैं। बताया जाता है कि भ्रष्टाचारी सरकार ने चंद अमीरों को करोड़ों रुपए के वित्तीय लाभ के लिए पर्यावरण का विनाश और गरीब गांव वालों की जिंदगी उजाड़ने का क्रूर पैâसला ले लिया। उल्लेखनीय है कि नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वयं वर्ष २०२२ के बजट सत्र में विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में स्पष्ट किया था कि तकनीकी रूप से पहाड़ पर कारशेड उपयुक्त नहीं है।
अचानक दे दी गई हरी झंडी
पर्यावरण प्रेमी ये आरोप लगा रहे हैं कि बिल्डरों के लाभ के लिए सुभाषचंद्र बोस मैदान स्टेशन के आसपास की खुली जमीनों को छोड़कर पहाड़ियों पर लगे १२,४०० से अधिक पेड़, शहर के प्रमुख ऑक्सीजन स्रोत, पर्यावरण, जंगली पक्षी-जानवर, प्राकृतिक जलस्रोत और साथ ही कृषि-बागवानी और पेड़-पौधे नष्ट कर कारशेड के निर्माण हेतु लाल रंग की झंडी अचानक हरे में बदल गई और शुरू हुआ शहरी वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धाराओं की धज्जियां उड़ाने और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन का खेल, जिसमें पेड़ों की उम्र कम बताकर और बिना नंबरिंग के क्रूरता से काटा गया।
पर्यावरण प्रेमी धीरज परब ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने शिकायती पत्र में पेड़ों को काटने के निर्णय पर तुरंत रोक लगाने की तथा एमएमआरडीए और मनपा के सभी संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ शहरी वृक्ष संरक्षण और संरक्षण अधिनियम, भारतीय न्यासंहिता, लोक सेवक और सेवा अनुशासन, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आदि के अनुसार मामला दर्ज करने की मांग की है।
