-तेल की आग में निवेशकों की उम्मीदें झुलसीं
-पश्चिम एशिया में तनाव से शेयर बाजार में गिरावट
-विदेशी निवेश और महंगाई पर भी बढ़ी चिंता
मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पीटीआई आधारित रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग `२१ लाख करोड़ की कमी आई।
यह आंकड़ा बाजार में शेयरों के मूल्यांकन में आई गिरावट दर्शाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि निवेशकों के बैंक खातों से इतनी नकद रकम निकल गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से आयात बिल, परिवहन खर्च और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। शेयर बाजार के लिए दूसरी चुनौती विदेशी निवेशकों की गतिविधियां हैं। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पूंजी निकाल सकते हैं, जिससे शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल छोटे निवेशकों का है। म्यूचुअल फंड, सेवानिवृत्ति बचत और प्रत्यक्ष शेयर निवेश के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवार बाजार से जुड़े हैं। सरकार और आर्थिक नियामकों के सामने चुनौती बाजार की अस्थिरता के कारणों पर स्पष्ट जानकारी देने की है। साथ ही तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का आम उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल चार दिन की गिरावट को स्थायी आर्थिक नुकसान या भविष्य के बाजार रुझान का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मगर `२१ लाख करोड़ के मूल्यांकन में कमी ने वैश्विक तनाव के प्रति भारतीय बाजार की संवेदनशीलता जरूर उजागर की है।
