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मीरा-भायंदर में प्राइवेट कंपनी बनकर रह गई है भाजपा … अग्रवाल समाज करेगा बीजेपी का बॉयकॉट! … अग्रबंधुओं ने नरेंद्र मेहता पर जमकर साधा निशाना

सुरेश गोलानी / भायंदर
आगामी मीरा-भायंदर मनपा चुनाव में भाजपा द्वारा अग्रवाल समाज के किसी भी प्रतिनिधि को टिकट न दिए जाने से भारी नाराजगी सामने आई है। जानकारों का मानना है कि अग्रवाल समाज की यह नाराजगी चुनाव में भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है। दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के कट्टर समर्थक माने जाने वाले इस समाज के राष्ट्रवादी विचारधारा वाले लोग अब बगावत पर उतर आए हैं।
इसी विषय पर मंथन करने और निर्णय लेने के लिए भायंदर पश्चिम में आक्रोश सभा का आयोजन किया गया। समाज के लोगों ने विधायक नरेंद्र मेहता पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मीरा-भायंदर शहर में भाजपा सिर्फ एक व्यक्ति की प्राइवेट कंपनी बनकर रह गई है जिसमें लोकतंत्र, निष्ठा और स्वाभिमान का कोई मोल नहीं रह गया है। भाजपा ने न सिर्फ समाज से जुड़े मौजूदा नगरसेवकों के टिकट काटे बल्कि किसी नए चेहरे या युवा कार्यकर्ताओं को मौका भी नहीं दिया। सभा में सैंकड़ों की संख्या में पुरुष, महिला और युवाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए मेहता के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया और चुनाव में भाजपा का बॉयकॉट तथा समाज से जुड़े उम्मीदवारों का समर्थन करने का निर्णय लिया। मेहता की कथित निरंकुश कार्यशैली के कारण शहर में पुराने कार्यकर्ताओं और कट्टर पार्टी समर्थकों का एक बड़ा वर्ग पिछले कुछ वर्षों से नाखुश है, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले नरेंद्र मेहता पर पार्टी हमेशा से ही मेहरबान रही है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त मेहता द्वारा बेफिक्र होकर विनेबिलिटी पैâक्टर जैसे मापदंड की आड़ में उम्मीदवारों का चयन किया गया। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र मित्तल के अनुसार, मीरा-भायंदर भाजपा में जो कुछ भी चल रहा है वो हमें बिल्कुल भी मान्य नहीं है।
न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी!
प्रभावशाली प्रतिनिधियों का वर्चस्व खत्म करने की सोची समझी साजिश के तहत टिकट काटे गए हैं। राजनैतिक जानकारों की मानें तो यही वर्चस्व कुछ मौजूदा नगरसेवकों और वरिष्ठ नेताओं के लिए मुसीबत की वजह बन गई, स्थानीय नेतृत्व आगे चल कर ऐसे प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा संभावित टकराव और अधिक ताकतवर बनने के सपने को टिकट नकार के उन्हें जड़ से ही समाप्त करने की एक सोची समझी साजिश बताई जा रही है। समाज के युवा कार्यकर्ता राकेश अग्रवाल ने कहा कि एक आदमी जिसका नाम नरेंद्र मेहता है, उसका जो घमंड है वो उतारना शहर के भविष्य के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

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