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महायुति सरकार में `रक्षक’ बने भक्षक… बलात्कार और प्रताड़ना से तंग महिला डॉक्टर ने की आत्महत्या!

-हाथ पर लिखा सुसाइड नोट

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार में रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। पुलिस अधिकारियों के कारनामों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है और पुलिस की वर्दी को कलंकित कर दिया है। मुंबई सहित महाराष्ट्र पुलिस की कर्तव्य निष्ठा का उदाहरण विश्व में दिया जाता है, लेकिन सातारा के फलटण शहर के उप-जिला अस्पताल में कार्यरत एक महिला डॉक्टर ने शहर के एक होटल में आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले मृतक डॉक्टर ने अपनी हथेली पर एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने दो पुलिस अधिकारियों पर बलात्कार और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद से पूरे राज्य में खलबली मच गई है।
महिला डॉक्टर ने सुसाइड नोट में कहा है कि पुलिस सब-इंस्पेक्टर ने उसके साथ बार-बार बलात्कार किया। साथ ही पुलिस अधिकारी ने उसे लगातार चार महीनों तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी नींद उड़ा दी है।
गृह विभाग सो रहा है क्या?
फलटण की इस घटना ने महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है और अगर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस ही उनके साथ बलात्कार कर रही है तो जनता किसकी ओर देखे? यह सवाल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की उपनेता सुषमा अंधारे ने उठाया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि राज्य का गृह विभाग सो रहा है क्या?
दोषियों को फांसी दो
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि महिला डॉक्टर के साथ पुलिस ने बलात्कार और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। अगर एक पढ़ी-लिखी महिला को ऐसा कदम उठाना पड़ा तो आम महिलाओं की क्या हालत होगी? इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए और आरोपियों को मौत की सजा होनी चाहिए।
असली वजह की हो जांच
राकांपा (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि महिला डॉक्टर की आत्महत्या का मामला बेहद गंभीर है। आखिरकार, उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के पीछे असली वजह क्या है? इस महिला की शिकायत पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? इन सब बातों की गहन जांच होनी चाहिए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने का दबाव!
एनसीपी विधायक रोहित पवार ने कहा कि पता चला है कि संबंधित महिला डॉक्टर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। जो बेहद भयावह है। इस घटना ने न केवल गृह विभाग की छवि धूमिल की है, बल्कि पूरे महाराष्ट्र को इस घटना ने कलंकित किया है।

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