मुख्यपृष्ठसमाचारसीटों की राजनीति में महापुरुषों का अपमान!

सीटों की राजनीति में महापुरुषों का अपमान!

जेदवी / मुंबई

बीएमसी हॉल से हटेंगी ऐतिहासिक मूर्तियां

१३३ साल की विरासत पर संकट

मुंबई की पहचान मानी जाने वाली १३३ वर्ष पुरानी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (मनपा) की ऐतिहासिक कॉरपोरेशन इमारत एक नए विवाद के केंद्र में आ गई है। पार्षदों की बढ़ती संख्या के कारण कॉरपोरेशन हॉल में बैठने की जगह कम पड़ने लगी है और इसी समस्या के समाधान के लिए महायुति सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव ने विरासत प्रेमियों, इतिहासकारों और नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रस्ताव के अनुसार, कॉरपोरेशन हॉल में स्थापित करीब १२ ऐतिहासिक मूर्तियों और बस्ट को हटाकर नई सीटिंग व्यवस्था बनाई जाएगी।
यह मुद्दा केवल अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत से भी सीधे जुड़ा हुआ है। बीएमसी का यह कॉरपोरेशन हॉल दशकों से मुंबई के प्रशासनिक इतिहास का साक्षी रहा है। इसी हॉल में शहर के विकास से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं, महानगरपालिका का बजट पेश किया जाता है और मुंबई के भविष्य की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होती है।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में २३७ पार्षदों के बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। इसी कारण हॉल में मौजूद महापुरुषों की मूर्तियों और स्मृति चिह्नों को हटाने का विकल्प सामने रखा गया है। हालांकि इस प्रस्ताव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि जगह की कमी दूर करने के लिए क्या महापुरुषों की निशानियों को हटाना ही एकमात्र उपाय है?
विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल तकनीकी या प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील मामला है। मुंबई केवल आधुनिक इमारतों और विकास परियोजनाओं का शहर नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं की भी पहचान रखता है। ऐसे में बीएमसी के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि वह विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाएगी या अतिरिक्त सीटों के लिए इतिहास की अमूल्य धरोहर को पीछे छोड़ देगी। अब सभी की निगाहें इस महत्वपूर्ण फैसले पर टिकी हैं।
इतिहास बचाने की उठी मांग
विरासत विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि जगह की समस्या का समाधान महापुरुषों की स्मृतियों को हटाकर नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बीएमसी केवल प्रशासनिक इमारत नहीं, बल्कि मुंबई की सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक पहचान का प्रतीक है, जिसकी ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना जरूरी है।
१३३ साल की विरासत पर संकट
मुंबई की ऐतिहासिक बीएमसी इमारत के कॉरपोरेशन हॉल में बढ़ती पार्षद संख्या के कारण नई सीटिंग व्यवस्था की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए हॉल में स्थापित करीब १२ ऐतिहासिक मूर्तियों और बस्ट को हटाने का प्रस्ताव सामने आया है, जिससे विरासत संरक्षण को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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