-दाल की कीमतें थामने के लिए आयात शुल्क घटाने की तैयारी
-सोना `१.४९ लाख प्रति दस ग्राम के करीब पहुंचने से विवाह और त्योहारी बजट बेहाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
त्योहारों के मौसम में महंगाई ने आम परिवार को दोनों ओर से घेर लिया है। एक तरफ रोज की थाली में जरूरी दाल के दाम चढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ शादी और त्योहारों की खरीदारी से जुड़ा सोना `१.४९ लाख प्रति दस ग्राम के करीब पहुंच गया है। अब सरकार दाल की आग बुझाने के लिए विदेशी बोरी का सहारा लेने पर विचार कर रही है।
केंद्र सरकार मसूर और पीली मटर समेत कुछ दालों पर आयात शुल्क घटा सकती है। फिलहाल लाल मसूर पर १० प्रतिशत और पीली मटर पर ३० प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। अरहर और उड़द का शुल्क-मुक्त आयात मार्च २०२७ तक पहले ही खोल दिया गया है। चने को संभावित कटौती से बाहर रखा जा सकता है, ताकि अक्टूबर से शुरू हो रही बुवाई में घरेलू किसानों की कीमत न टूटे। अभी अंतिम पैâसला नहीं हुआ है। कमजोर मानसून ने संकट बढ़ाया है। प्रमुख दाल उत्पादक क्षेत्रों में बारिश सामान्य से ३० प्रतिशत तक कम रही। वर्ष २०२४-२५ में भारत ने २५७ लाख टन दाल पैदा की, लेकिन मांग पूरी करने के लिए ७३ लाख टन आयात करना पड़ा।
इधर सोने ने त्योहारी बजट की कमर तोड़ दी है। तीन अक्टूबर को २४ वैâरेट सोने का सांकेतिक भाव करीब `१४,९१८ प्रति ग्राम और २२ वैâरेट का `१३,६७५ प्रति ग्राम रहा। दस ग्राम २४ वैâरेट सोना करीब `१,४९,१८० और २२ वैâरेट `१,३६,७५० बैठता है। जीएसटी और बनवाई जुड़ने के बाद गहनों की वास्तविक कीमत और ऊपर जाएगी। यानी थाली में दाल महंगी और तिजोरी में सोना पहुंच से बाहर, महंगाई ने आम आदमी के भोजन से लेकर बेटी के विवाह तक हर बजट पर हमला बोल दिया है।
