– महेंद्र हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समाप्त; पुणे में सत्याग्रह जारी
– प्रदर्शनकारी बोले, `पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेकर विवेक भीमनवार इस्तीफा दें
सामना संवाददाता / पुणे
एमपीएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के दबाव में सचिव महेंद्र हरपालकर की कुर्सी चली गई, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ। पुणे में प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने शनिवार को भी सत्याग्रह जारी रखते हुए आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग बुलंद की।
राज्य सरकार ने प्रशासनिक कारण बताते हुए हरपालकर की एमपीएससी सचिव पद पर प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी है। उन्हें तत्काल पदभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। छात्रों ने सचिव को हटाने का स्वागत किया, लेकिन इसे अधूरी कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही केवल सचिव तक सीमित नहीं रखी जा सकती। पुणे के एस.एम. जोशी पुल के पास चल रहे आंदोलन में सैकड़ों परीक्षार्थी जुटे। विधायक रोहित पवार छात्रों के सत्याग्रह में शामिल हुए, जबकि सांसद सुप्रिया सुले, विधायक विश्वजीत कदम और अन्य नेताओं ने आंदोलन स्थल पहुंचकर मांगों का समर्थन किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि एमपीएससी अध्यक्ष संवैधानिक पद पर हैं। राज्य सरकार अथवा राज्यपाल उन्हें सीधे पद से नहीं हटा सकते। संविधान के अनुच्छेद ३१७ के तहत सर्वोच्च न्यायालय की सिफारिश पर राष्ट्रपति ही अध्यक्ष को हटा सकते हैं, लेकिन आंदोलनकारी कानूनी प्रक्रिया से पहले नैतिक जवाबदेही का सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब परीक्षा रद्द हो, पेपर बाहर पहुंचे और भर्ती व्यवस्था से छात्रों का भरोसा उठ जाए, तो केवल सचिव बदलना पर्याप्त नहीं है। सचिव हट गए, लेकिन अध्यक्ष की कुर्सी कायम है, इसीलिए सड़क पर बैठा छात्र भी अभी उठने को तैयार नहीं है।
