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सात साल बाद भी अधूरे कारशेड, कब दौड़ेगी नई लोकल?

-भिवपुरी-वाणगांव कारशेड परियोजना में देरी से मुंबई की लोकल विस्तार योजना पर सवाल
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य में बढ़ने वाले लोकल ट्रेनों के बेड़े के रखरखाव के लिए प्रस्तावित भिवपुरी और वाणगांव कारशेड सात साल बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं हो सके हैं। वर्ष २०१९ में मुंबई रेलवे विकास निगम की एमयूटीपी-३ए योजना में शामिल किए गए इन दोनों कारशेड की निर्माण प्रक्रिया जमीन अधिग्रहण, मंजूरियों और टेंडर की प्रक्रिया में लंबे समय तक उलझी रही।
भिवपुरी कारशेड के लिए ४५.२४ हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है, लेकिन मुख्य सिविल कार्यों का ठेका अगस्त २०२५ में जाकर दिया गया। यानी मंजूरी के करीब छह साल बाद निर्माण कार्य का ठेका मिला। अब तक करीब ७.१६ लाख घन मीटर मिट्टी का काम पूरा होने की जानकारी है, जबकि सुरक्षा दीवार समेत कई जरूरी काम अभी अधूरे हैं। पुलों के डिजाइन और कारशेड के इंजीनियरिंग प्लान की मंजूरी की प्रक्रिया भी धीमी चाल चल रही है।
दूसरी ओर वाणगांव कारशेड की स्थिति और भी धीमी है। यहां करीब ४३.६८ हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जिसमें बड़ा हिस्सा वन भूमि का है। फरवरी २०२६ में पहले चरण की सैद्धांतिक वन मंजूरी मिली, लेकिन दूसरे चरण की मंजूरी अभी बाकी है।
दोनों परियोजनाओं पर करीब २,३५३ करोड़ रुपए खर्च का प्रावधान है। इन कारशेड के तैयार होने से मौजूदा कुर्ला, कलवा, सानपाड़ा, मुंबई सेंट्रल, कांदिवली और विरार जैसे कारशेड पर दबाव कम होने की उम्मीद है। भिवपुरी में भविष्य में १२ डिब्बों वाली २० लोकल ट्रेनों की स्थिरता और रखरखाव की सुविधा विकसित करने की योजना है। लेकिन सवाल यह है कि जब मुंबई में नई लोकल सेवाओं और नए रूटों के विस्तार की तैयारी हो रही है, तो ट्रेनों के रखरखाव के लिए जरूरी कारशेड सात साल बाद भी अधूरे पड़े हैं।
कारशेड अधूरे, लोकल विस्तार अटका
भिवपुरी और वाणगांव कारशेड पर करीब २,३५३ करोड़ रुपए खर्च होने हैं। सात साल बाद भी दोनों परियोजनाएं अधूरी हैं। नई लोकल सेवाओं और नए रूटों की योजना के बीच कारशेड की धीमी रफ्तार से रेलवे की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

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