-आम जनता ने कहा- अब बर्दाश्त के बाहर है तानाशाही
द्रुप्ति झा / मुंबई
दक्षिण मुंबई की सड़कें कल केवल राजनीतिक झंडों से नहीं, बल्कि आक्रोशित मुंबईकरों के कदमों से थर्रा उठीं। मेट्रो सिनेमा जंक्शन से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और मुंबई मनपा मुख्यालय तक का पूरा मार्ग लोकतंत्र बचाओ और वोट चोरो गद्दी छोड़ो के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जब सामना संवाददाता ने मोर्चे में शामिल आम नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से बात की, तो हर किसी के मन में सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के प्रति भारी गुस्सा दिखाई दिया।
आंदोलन में शामिल
आम जनता ने क्या कहा?
एक वरिष्ठ नागरिक विजय सावंत ने कहा कि हमारे मताधिकार पर डवैâती डाली जा रही है। हम कोई राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हैं, हम आम नागरिक हैं, लेकिन जिस तरह से वोटर लिस्ट से वैध नागरिकों के नाम गायब किए जा रहे हैं और विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है, उसने हमें सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है। अगर हमारा वोट ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो लोकतंत्र कहां बचेगा?
परेल, कॉलेज छात्रा स्नेहा पाटील ने कहा कि युवाओं के भविष्य और अधिकारों की लड़ाई है। आज का यह मोर्चा सिर्फ चुनाव आयोग के खिलाफ नहीं, बल्कि सत्ता की तानाशाही के खिलाफ है। देश में निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए। हम ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग कोई पारदर्शी जवाब नहीं दे पा रहा है। ठाकरे बंधुओं का एक साथ आना मुंबई के युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण है।
गिरगांव, स्थानीय रहिवासी रमेश कदम ने कहा कि मुंबई को अडानी और दिल्ली के हवाले करने की साजिश है। आज मेट्रो सिनेमा से मनपा मुख्यालय तक जो जनसैलाब उमड़ा, वह इन भ्रष्ट सत्ताधारियों को चेतावनी है कि मुंबई को दिल्ली के इशारे पर चलने वालों की जागीर नहीं बनने दिया जाएगा।
कुर्ला, गृहिणी शबाना शेख ने कहा कि रोटी, कपड़ा और अधिकार सब खतरे में है तथा महंगाई से आम जनता की कमर टूट चुकी है और जब हम चुनाव में अपना गुस्सा जाहिर करने जाते हैं, तो पता चलता है कि हमारा नाम ही वोटर लिस्ट से कट गया है। यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है। आज हम अपने बच्चों के भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा के लिए इस गर्जना आंदोलन में शामिल हुए हैं।
