-चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव, सड़कों पर उतरा सैलाब
-एसआईआर से शुरू विवाद अब जवाबदेही तक पहुंचा
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल अब सड़कों पर पहुंच गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन तेज रहे। विपक्षी दलों और युवा संगठनों के प्रदर्शनों के बीच पुलिस की हिरासत की कार्रवाई ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। रविवार को कांग्रेस ने दिल्ली में एक और प्रदर्शन का ऐलान किया, जबकि मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त मोर्चा निकालकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
विवाद की जड़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर है। विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। उनका सवाल है कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के नाम पर यदि वास्तविक मतदाताओं के नाम ही संदेह के घेरे में आ जाएं, तो लोकतंत्र में आम नागरिक के वोट के अधिकार की सुरक्षा कौन करेगा? हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में असली लड़ाई अब आरोप और जवाब के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बनती दिखाई दे रही है।
लोकतंत्र की असली
परीक्षा पारदर्शिता की
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची में बदलाव की पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है? जिन नागरिकों के नाम हटे या प्रभावित हुए, उन्हें पर्याप्त सूचना दी गई या नहीं? उन्हें अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का उचित अवसर मिला या नहीं? और यदि विपक्ष लगातार इन सवालों को उठा रहा है तो चुनाव आयोग उनका जवाब सार्वजनिक रूप से कितनी स्पष्टता से देगा?
सत्ता से बड़ा सवाल-वोट का अधिकार
लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं और राजनीतिक दल बदलते रहते हैं, लेकिन मतदाता का वोट लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। इसलिए मामला अब केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। असली सवाल यह है कि मतदाता सूची तैयार करने वाली संस्था पर जनता का भरोसा कितना मजबूत है और उस भरोसे को बनाए रखने के लिए आयोग कितनी पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाता है।
हिरासत की कार्रवाई से और गरमाया माहौल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं ने विवाद को और हवा दे दी। रॉयटर्स के मुताबिक, लगातार तीसरे दिन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। कुछ मामलों में निषेधाज्ञा के उल्लंघन को लेकर भी कार्रवाई दर्ज की गई। इससे प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ता दिखाई दिया।
