-वायुसेना प्रमुख की चेतावनी से बढ़ी चिंता; दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का सहयोग भारत के लिए नई चुनौती
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पाकिस्तान और चीन की बढ़ती सैन्य नजदीकी अब भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक चुनौती नहीं रह गई है। दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तकनीक को लेकर बढ़ता सहयोग भारतीय सुरक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर संभावित सहयोग पर चिंता जताते हुए इसे भारत के लिए ‘चिंता का कारण’ बताया है।
बदल रहा युद्ध का समीकरण
आज की लड़ाई केवल मिसाइल और टैंक की ताकत से नहीं लड़ी जाती। स्टील्थ तकनीक, लंबी दूरी के हथियार, अत्याधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली किसी भी संघर्ष का रुख बदल सकती है। ऐसे में पाकिस्तान का चीन के साथ अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तकनीक की दिशा में आगे बढ़ना भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पाकिस्तान को चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों या उनसे जुड़ी तकनीक तक पहुंच मिलती है, तो भारतीय वायुसेना अपनी मौजूदा क्षमता को कितनी तेजी से मजबूत कर पाएगी?
३० स्क्वाड्रन पर अटकी वायुसेना, लक्ष्य ४२ का
वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। भारतीय वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या स्वीकृत ४२ के मुकाबले करीब ३० के आसपास है। वायुसेना की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए आने वाले वर्षों में हर साल लगभग ३६ से ४० नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत बताई गई है।
