मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है : मॉडलिंग की उड़ान के लिए मासूमों को मार डाला!

गजबे है : मॉडलिंग की उड़ान के लिए मासूमों को मार डाला!

उमा सिंह

आज ‘गजबे’ के लिए कुछ चुटकीला लिखने बैठी ही थी कि नजर केरल की इस भयावह खबर पर पड़ गई। कलम व्यंग्य लिखने चली थी, मगर खबर पढ़कर ठिठक गई। आखिर इसे ‘गजबे’ वैâसे कहें, जब सामने दो मासूम बच्चों की मौत का दर्द हो?
पुलिस के मुताबिक, एक मां पर अपनी पांच साल की बेटी और तीन साल के बेटे की हत्या का आरोप है। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि बच्चों को उसकी मॉडलिंग से जुड़े सपनों में बाधा माना जा रहा था। आरोप अभी जांच के दायरे में हैं, लेकिन अगर ये सच साबित होते हैं तो सवाल सिर्फ दो जिंदगियों के खत्म होने का नहीं होगा, बल्कि उस सोच का भी होगा, जिसमें महत्वाकांक्षा के आगे इंसानी रिश्ते बौने पड़ जाएं। करियर बनाना गलत नहीं है, सपने देखना भी गलत नहीं। हर महिला को अपनी पहचान और अपने सपनों के लिए आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है। लेकिन आजादी का अर्थ जिम्मेदारियों से मुक्ति तो नहीं हो सकता, बच्चे करियर की राह में रखा कोई सामान नहीं हैं, जिसे रास्ता रोकने पर हटा दिया जाए। वे जिंदगी की अहम जिम्मेदारी हैं।
व्यंग्य यहां सपनों पर नहीं, उस भयावह सोच पर है, जो सपनों की कीमत इंसानियत से वसूलने लगे। करियर जरूरी है, पहचान जरूरी है, महत्वाकांक्षा भी जरूरी है, लेकिन इंसानियत से बड़ी कोई मंजिल हो सकती है क्या..?

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