फिरोज खान
मुंबई सहित देशभर में इन दिनों बैंक अधिकारी खतरनाक साबित हो रहे हैं। चंद पैसों के लालच में मैनेजर अपने पेशे से बेमानी कर रहे हैं और जनता के साथ धोखा कर रहे हैं। बैंकों के कुछ मैनेजर जिस तरह से सायबर ठगों से हाथ मिलाकर वित्तीय अपराध कर रहे हैं, उससे यही मालूम होता है बैंक मैनेजर साइबर क्रिमनलों के ‘गॉडफादर बन गए हैं। इनकी मदद के बगैर साइबर अपराधी अधूरे हैं। फर्जी खाते खुलवाना, खाता धारकों का डेटा और सारी गोपनीय जानकारी साइबर ठगों को उपलब्ध करवाना इनका मुख्य पेशा बन गया है। कमीशन के चक्कर में ये अपना जमीर बेचकर अपने पेशे से धोखा कर रहे हैं। इनके द्वारा किए जा रहे जराइम की वजह से आम लोगों के साथ करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी हो रही है। कितने बुजुर्ग अपनी जीवनभर की कमाई गंवा चुके हैं। सायबर ठगी के एक दो नहीं, दर्जनों भयावह मामले सामने आ चुके हैं। अब सवाल यह है कि बैंक मैनेजर सायबर ठगों के संपर्क में वैâसे आते हैं।
इन दोनों के बीच एजेंट होते हैं, जो बड़ी चालाकी से काम करते हैं। ये एजेंट करंट अकाउंट खुलवाने के बहाने बैंक मैनेजर से संपर्क करते हैं और जान पहचान बना लेते हैं। इस बीच वे ये ताड़ने की कोशिश करते हैं कि मैनेजर पैसों का लालची है कि नहीं। ये पता चलते ही एजेंट मैनेजर को और खाता खुलवाने की बात करते हैं और इसके एवज में हर खाते पर मोटी रकम देने का ऑफर दे देते हैं। बात बनते ही फर्जी खाता खोलने का काम शुरू हो जाता है। एजेंट फर्जी खाता का नंबर साइबर क्रिमनलों को उपलब्ध करवाते हैं, फिर सायबर ठग प्रâॉड किया हुआ पैसा खातों में ट्रांसफर करवाकर अपने काम को अंजाम देते हैं। मुंबई की बात करें तो ११ नवंबर को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक निजी बैंक के मैनेजर को डिजिटल अरेस्ट साइबर क्राइम केस में गिरफ्तार किया है, जो साइबर अपराधियों के साथ मिलकर फर्जी खातों के जरिए साइबर प्रâॉड की रकम के लेनदेन में शामिल था। सीबीआई की जांच में सामने आया कि आरोपी मैनेजर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से कुछ खातों को मंजूरी दी और इसके बदले रिश्वत ली। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया गया, जिनमें डिजिटल अरेस्ट प्रâॉड जैसे कई मामले मामले शामिल हैं। ७ नवंबर को लखनऊ में करोड़ों रुपए की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने इंडसइंड बैंक के डिप्टी ब्रांच मैनेजर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों ने फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर ठगी से कमाए गए पैसों को उनमें मंगवाया। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इन लोगों के खिलाफ ४० से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं।
गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि वे साइबर ठगी के पैसों का हिसाब-किताब देखते थे और साइबर ठगी से कमाए गए २० करोड़ रुपए में से २० प्रतिशत कमीशन के तौर पर उन्होंने लिए थे। जून महीने में शेयर बाजार में निवेश के नाम पर गुरुग्राम के मानेसर के रहने वाले एक व्यक्ति से ५८ लाख रुपए की ठगी के मामले में आगरा से पकड़े गए पूर्व बैंक मैनेजर से पूछताछ व पुलिस जांच में कई जानकारियां सामने आईं। पुलिस के मुताबिक, पूर्व बैंक मैनेजर दिसंबर २०२४ में साइबर ठगों के संपर्क में आया था। इसके बाद उसने साइबर ठगी के लिए १५ से ज्यादा खाते उन्हें उपलब्ध कराए। नौकरी छोड़ने के बाद आरोपी ने कई खाताधारकों से संपर्क किया और मोटी रकम का लालच देकर खाते खरीद लिए। आरोपी ने १५ से ज्यादा ऐसे करंट खाते साइबर ठगों तक पहुंचाए। इन्ही खातों का इस्तेमाल मानेसर के रहने वाले एक व्यक्ति से ५८ लाख रुपये की ठगी में उपयोग किया गया था।
