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तहकीकात : हैवानियत से बढ़कर हैवानियत… मां का कलेजा, दिल और दिमाग भूनकर खाने लगा बेटा

फिरोज खान

कहते है न कि हर बुराई की जड़ शराब होती है। शराब के नशे में शराबी इस कदर हैवानियत पर उतर आता है कि हैवानियत भी शरमा जाती है। एक ऐसी हत्या जिसे सुनकर इंसान की रुह कांप उठे। बात सिर्फ हत्या तक ही सीमित नहीं रही। उसके बाद उसने जो कृत्य किया उसे चाहे जितना कड़े शब्दों में कहा जाए फिर भी कम है। इंसान तो छोडिए जानवर भी घृणित काम नहीं कर सकता और यह दरिंदगी किसी और ने नहीं बल्कि एक बेटे ने अपनी सगी मां के साथ की। दिलदहला देने वाला वाकया जब सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया।
कोल्हापुर के माकडवाला इलाके में एक युवक रहता था। उसे शराब और जुए की बुरी लत थी। कमाना-धमाना छोड़िए शराब पीने के लिए पैसे बूढ़ी मां से जबरन छीन लेता था। मना करने पर मां की बुरी तरह पिटाई करता था। काफी उम्र होने के बावजूद वह लोगों के घरों में काम करती थी। एक बेटा था, लेकिन नालायक। दिन भर दोस्तों के साथ घूमना, शराब पीना और जुए में हार जाना उसकी जिंदगी बन गया था। एक दिन ६३ साल की बुजुर्ग महिला घरों का काम कर थक हारकर घर पंहुची। बेटा इंतजार में बैठा हुआ था। मां के आते ही बेटा शराब के लिए पैसे मांगने लगा। उस दिन मां के पास पैसे नहीं थे, क्योंकि उसने अपने लिए दवाइयां खरीदी थी। मां ने पैसे नहीं होने की बात कही तो बेटा आग बबूला हो गया। गुस्से में आकर पीटने लगा और वह जहां पैसे रखती थी, वहां तलाशने लगा। मां बेटे के आगे गिड़गिड़ा रही थी और कह रही थी पैसे आ जाएंगे तो देगी। बेटे को शराब की तलब लगी हुई थी। शराब के बगैर वह बौखलाया हुआ था। घर में रखा चाकू लिया और मां के पेट में घोंप दिया। एक के बाद एक चाकू से कई वार कर दिए। मां की मौके पर मौत हो गई। इसके बाद भी उसकी बेरहमी और हैवानियत नहीं रुकी। धारदार हथियार से अपनी मां के टुकड़े-टुकड़े करने शुरू कर दिए, उसके शरीर के अंदरूनी अंग खींच कर बाहर निकाले, उसने पहले दिमाग निकाला, फिर चाकू से दिल निकाल लिया, इसके बाद एक-एक कर उसका लीवर, किडनी और आंत बाहर निकाले। शैतान की हैवानियत यहां भी खत्म नहीं हुई। बेटे ने अपनी मां के दिल, दिमाग, लिवर और किडनी को कढ़ाई में डालकर नमक-मिर्च के साथ खाना शुरू कर दिया। पड़ोसियों को घटना की भनक लगी तो वे घटना वाले घर में पंहुचे। अंदर का डरावना दृष्य देखकर हर कोई दहल उठा। पड़ोसियों ने फोन कर पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। स्थानीय अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई है। इसके खिलाफ उसने मुंबई हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। करीब तीन साल की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने १ अक्टूबर को कोल्हापुर की अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस’ माना है।

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